भारत में सड़क वैज्ञानिकों ने सिद्धांत रूप में ले लिया। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 के दौरान पूरे देश में 1,83,382 लोगों की जान चली गई, यानि हर घंटे औसतन 21 व्यक्तिगत सड़क पर खरीदारी में मर रहे हैं। प्रतिदिन 502 चरित्र विवरण दिए गए हैं। सड़क उद्यमों की कुल संख्या 5.30 प्रतिशत प्रतिशत 5,13,563 हो गई, जिसका मतलब है कि हर घंटे 59 मौतें हो रही हैं।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री बोटी दास ने लिखित उत्तर में ये आंकड़े दिए हैं। ये आंकड़े सड़क सुरक्षा की गंभीर स्थिति को प्रभावित करते हैं। दोपहिया साझीदारी की भागीदारी सबसे अधिक है। बहुसंख्यक आबादी, बहुसंख्यक आबादी और छात्र-छात्राओं की संख्या में कमी के मुख्य कारण हैं। सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए रणनीति भी बनाई है. हालाँकि, इन रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि अभी भी काफी कुछ सुधार की शुरुआत हुई है।
नौकरी और व्यवसाय के प्रमुख दस्तावेज
2025 में कुल 5,13,563 सड़क दुर्घटनाएँ दर्ज की गईं, जो 2024 की तुलना में काफी अधिक हैं। इनके 1,83,382 टुकड़े टुकड़े। हर दिन औसत 502 और हर घंटे 21 कलाकार इस समस्या की संख्या को देखते हैं।
राज्यवार स्थिति
तमिलनाडु में सबसे अधिक 71,387 सड़क दुर्घटनाएँ हुईं, जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 27,550 सड़क दुर्घटनाएँ हुईं। दोनों राज्यों में आबादी और समुदायों की संख्या अधिक होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है।
पिछले वर्षों की तुलना
2023 में 4,80,583 सज़ा में 1,72,890 ट्रेलर हुई थी। 2024 में ये संख्या 4,87,707 हताहत और 1,77,175 मौतें हुईं। 2025 में ये किरदार अब काफी ज्यादा 5,13,563 हो गया है।
सरकार की रणनीति
बौद्ध मठ के अनुसार, केंद्र सरकार ने सड़क सुरक्षा के लिए ‘4E’ रणनीति अपनाई है. इसमें शिक्षा (शिक्षा), इंजीनियरिंग (सड़कों और समुदायों की इंजीनियरिंग), प्रवर्तन (प्रवर्तन) और आपातकालीन देखभाल (आपातकालीन देखभाल) शामिल हैं। सरकार द्वारा इन 4 बड़े बिंदुओं पर काम जारी है।
मुख्य कारण और चिंता
भारत दुनिया के देशों में शामिल है, जहां सड़क दुर्घटनाएं और दुर्घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। ज्यादातर मामले दोपहिया गिरोह से जुड़े हुए हैं। गति का उल्लंघन, शराब पीकर ड्राइविंग, खराब सड़कें और जागरूकता की कमी के कारण हर साल लाखों लोग मर रहे हैं। ये दस्तावेज़ सड़क सुरक्षा को देशभक्ति की आवश्यकता पर जोर देते हैं।


