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मेरे राम :भगवान श्रीराम भारत के प्रतिरूप, उनका आचरण मानव के लिए अनुकरणीय – If Ram Is Hope Then Ram Is Someone’s Thirst, He Is The Life Of Everyone.

Author: Ajay Kumar

Published: 04-10-2026, 4:16 AM

22 जनवरी को अयोध्या में नव निर्मित भव्य राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हो गई। प्राण प्रतिष्ठा का उल्लेख वेदों और पुराणों में किया गया है। हिंदू धर्म परंपरा में प्राण प्रतिष्ठा एक पवित्र अनुष्ठान है, जो किसी मूर्ति या प्रतिमा में उस देवता या देवी का आह्वान कर उसे पवित्र या दिव्य बनाने के लिए किया जाता है। प्राण शब्द का अर्थ है जीवन, जबकि प्रतिष्ठा का अर्थ है स्थापना। अर्थात प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है प्राण शक्ति की स्थापना या देवता को जीवंत स्थापित करना। रामलला अब जीवंत देवता का रूप ले चुके हैं।




यथा पिंडे तथा ब्रह्मांड अर्थात कण-कण में भगवान व्याप्त हैं। कण-कण मिलकर पत्थर बनता है। कण-कण मिलकर सृष्टि बनती है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद पत्थर में भी भगवान का जीवंत रूप देखने को मिलता है। मतलब पत्थर में भी भगवान हैं। भगवान राम की मूर्ति बनाने वाले योगीराज ने स्वीकार किया है कि उन्होंने जो मूर्ति बनाई थी वो मूर्ति प्राणप्रतिष्ठा के बाद जीवंत हो उठी। अर्थात जैसी थी वैसी नहीं दिख रही थी। इसे मैंने भी महसूस किया है, पर कुछ लोग इसको अंध विश्वास कहते हैं, पर ऐसा है नहीं। कहने का तात्पर्य जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी। अर्थात जिसकी जैसी दृष्टि होती है, उसे वैसी ही मूरत नज़र आती है।

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Author: Ajay Kumar

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