15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के दिन राजपथ से लेकर जब तक भारतीय सेना के जांबाज मार्च पास्ट करते हैं, तब तक उनकी वीरता के साथ एक और चीज लोगों का ध्यान खींचती है, वो है रॉयल एनफील्ड ओरिजिनल की गडग़ाहट। भारतीय सेना और संप्रदाय का संबंध केवल एक गाड़ी और सवार का नहीं है, बल्कि देशभक्त, भरोसेमंद और अटल गौरव के साथ एक ऐतिहासिक भागीदारी का है।
देश की रक्षा में कठिन से कठिन चट्टानी तूफान के लिए जिस प्रिय मित्र की आवश्यकता थी, उसने दशकों तक रॉयल एनफील्ड में भूमिका निभाई। आइए, आजादी के इस पावन पर्व पर जानते हैं कि आखिरकार भारतीय सेना ने अपनी आधिकारिक पहली बाइक के रूप में सामीरात को ही क्यों चुना और कैसे एक ब्रिटिश कंपनी (उस समय की) भारत की झलक देखने को मिली।
1949 का सीमा संकट और सम्राट का चुनाव
आजादी के तुरंत बाद 1947-48 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में भारत सरकार को ये कमजोर किले मिले, जो कि केश के बर्फीले और पथरीले द्वीप में शामिल थे, सेना को एक मजबूत, भारी और मजबूत बाइक की तरह मजबूत दरकार है। ऐसे में भारत सरकार ने सेना के लिए एक ऐसी बाइक की तलाश शुरू की, जो-
- बिना किसी परेशानी के, बिना किसी परेशानी के, बिना किसी रुकावट के।
- वज़न में भारी हो, ताकि तेज़ ऊँचाई और ढलानों में संतुलन न हो।
- मशीनरी में बेहद आसान और टिकाऊ हो।
उस समय रॉयल एनफील्ड नॉटिंघम 350 में फ़ोर-स्ट्रोक इंजन और राइड-आर्म ड्रॉप (स्विंगआर्म ड्रॉप) थे, जो उस दौर की बाकी बाइक्स के समूह में बेहद आगे थे। सेना ने परीक्षण किया और पाया कि हर मानक पर पूरी तरह से खरा उतरता है। 1952 में भारत सरकार ने ब्रिटेन की रॉयल एनफील्ड कंपनी को 350 के 800 यूनिट का ऑर्डर दिया, जो 1953 में भारत के कब्जे में था।
मद्रास मोटर्स और भारत में एनफील्ड इंडिया का जन्म
शुरुआत ब्रिटेन से पूरी तरह से तैयार (सीबीयू) बाइक्स की शुरुआत की जाती है। लेकिन लगातार मजबूत मांग और रख-रखाव की विचारधारा को देखते हुए भारत में इसे असेंबल करने का फैसला लिया गया। 1955 में इंग्लैंड की रॉयल एनफील्ड और भारत की मद्रास मोटर्स की जोड़ी बनी ‘एनफील्ड इंडिया’ की किताब. चेन्नई (तब मद्रास) के तिरुवनंतपुरम में प्लांट लगाया गया।
शुरुआत में गठबंधन ब्रिटेन से आया था और असेंबली भारत में हुई थी, लेकिन 1962 तक भारत में ही मित्रता की साझेदारी का निर्माण हुआ। आगे जब ब्रिटेन में मूल कंपनी बंद हो गई, तब भारतीय कंपनी का नाम रखा गया ‘रॉयल एनफील्ड’ रखा और इस समय पूरी दुनिया में डंका बज रहा है।
आज भारतीय सेना में कौन सी स्कूटर और बाइक हैं?
दशकों तक सीमा पर राज करने वाली साधिक के टोकियो में इलेक्ट्रानिक समय में भारतीय सेना के बेड़े में सुरक्षा और सलाह को ध्यान में रखते हुए कई नई बातें शामिल की गई हैं। आइये, पूरी लिस्ट देखते हैं।
मोटरसाइकिल: रॉयल एनफील्ड 350 और क्लासिक 500 के अलावा अब सेना में हीरो जीएस 150आर, टीवीएस अपाचे और दुर्गम एरिया के लिए रॉयल एनफील्ड हिमालयन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘डेयरडेविल्स’ और ‘टॉर्नेडोज़’ जैसे सेना के स्टंट रिकॉर्ड आज भी सैद्धान्तिक का उपयोग करने के लिए प्रदर्शित किए जाते हैं।
कार और एसयूवी: लंबे समय तक सर्विस देने वाली आइकॉनिक मारुति जिप्सी को अब धीरे-धीरे जारी किया जा रहा है। इसकी जगह अब बेहद मजबूत टाटा सफारी स्टॉर्म (GS800), महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक और फोर्स गुरखा जैसी 4×4 एसयूवी ले ली है।
बख्तरबंद और विशेष वाहन: असफ़ल युद्ध क्षेत्र के लिए सेना टाटा डब्ल्यूएचएपी, महिंद्रा एएलएसवी (आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल) और कल्याणी एम4 जैसे स्वदेशी बख्तरबंद एलायंस का इस्तेमाल किया जा रहा है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब हम अपने देश की समृद्धि और संप्रभुता के धनी बनते हैं, तो सीमा पर गठबंधन के टुकड़े-टुकड़े किए जाते हैं, डुग-डग की आवाज़ हर भारतीय के दिल में गर्व और सुरक्षा का एहसास जगाती है।


