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नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की कथा का पाठ, धर्म-अर्थ और मोक्ष की हो सकती है प्राप्ति

Author: Ajay Kumar

Published: 15-10-2026, 3:41 PM

नवरात्रि के छठे दिन देवी दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाती है। माता कात्यायनी की आराधना करने से भक्तों को अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के छठे दिन पूजा के दौरान माता कात्यायनी की आरती और मंत्रों का जप किया जाता है। इसके साथ ही आपको माता से जुड़ी पौराणिक कथाओं को भी इस दिन अवश्य पढ़ना चाहिए। आज इन्हीं कथाओं के बारे में हम आपको जानकारी देने जा रहे हैं।

माता कात्यायनी की कथा

देवी भागवत पुराण के अनुसार, एक समय में ‘कत’ नाम के एक विख्यात महर्षि हुआ करते थे। उनके नाम को देखते हुए ही उनके पुत्र का नाम कात्य पड़ा। इसके बाद एक समय पर ऋषि कात्य के गोत्र में कात्यायन नाम के एक प्रसिद्ध महर्षि हुए जो अपने कठोर तप से सारे संसार की माया को जान गए। महर्षि कात्यायन देवी दुर्गा के भक्त थे और उनकी मनोकामना थी की माता उनकी पुत्री के रूप में जन्म लें। माता को पुत्री के रूप में पाने के लिए महर्षि कात्यायन ने कई वर्षों तक कठोर तपस्या की। कात्यायन के तप से प्रसन्न होकर देवी दुर्गा ने उन्हें दर्शन दिए और साथ ही यह वचन भी दिया कि वो कात्यायन के घर में पुत्री रूप में जन्म लेंगी। इसके बाद माता दुर्गा ने कात्यायन के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया और माता का नाम कात्यायनी पड़ा।

एक अन्य कथा के अनुसार, एक समय भूलोक में महिषासुर नामक असुर हुआ। इस असुर ने अपने आतंक से सृष्टि में हाहाकार मचा दी थी। महिषासुर को वरदान प्राप्त था कि उसे कोई भी पुरुष कभी हरा नहीं सकता और ना ही मार सकता है। यही कारण था कि न केवल पृथ्वी लोक बल्कि देवलोक तक भी महिषासुर का खौफ फैला हुआ था। एक समय ऐसा भी आया जब महिषासुर ने देवलोक पर भी अपना कब्जा जमा लिया। माना जाता है कि महिषासुर के आतंक को खत्म करने के लिए त्रिदेवों- ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने अपने तेज से एक शक्ति उत्पन्न की जिसकी पूजा महर्षि कात्यायन ने ही सर्वप्रथम की थी और इसीलिए इस देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। माता कात्यायनी ने ही महिषासुर का वध किया था और सृष्टि की रक्षा की थी।

ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रज की गोपियों ने करुणावतार श्रीकृष्ण को अपने पति के रूप में पाने के लिए माता कात्यायनी की पूजा की थी। यही वजह है कि आज भी ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी माता कात्यायनी को माना जाता है।

यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Tech Enthusiast | Law & Accounting Expert | Web Developer | Blogger | Tally & SAP Specialist

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