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दिवाली और धनतेरस पूजा में जरूर करें लक्ष्मी चालीसा का पाठ, आर्थिक उन्नति के साथ ही सुख-समृद्धि की होगी प्राप्ति!

Author: Ajay Kumar

Published: 06-11-2026, 4:25 AM

माता लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है और धनतेरस से लेकर दिवाली तक माता लक्ष्मी की पूजा करने का विधान सदियों से चला आ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस से शुरू होने वाले दीपोत्सव के दौरान माता लक्ष्मी की जो भक्त पूजा करते हैं उनके जीवन में सुख-समृद्धि आ सकती है। धनतेरस हो या दिवाली माता लक्ष्मी की पूजा के दौरान लक्ष्मी चालीसा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। इस चालीसा का पाठ करने से माता की अनुकंपा आप पर बरसती है। आपको बता दें कि साल 2026 में धनतेरस 6 नवंबर को मनाया जा रहा है वहीं दीपावली का त्योहार 8 नवंबर को मनाया जाएगा।

दोहा

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।

मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥

सोरठा

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।


सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

॥चौपाई॥

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही॥

श्री लक्ष्मी चालीसा

तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥

जय जय जगत जननि जगदम्बा । सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥

तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥

जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥

ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
जब विष्णु ने क्षीर सागर का मंथन किया। सिन्धु में उन्हें चौदह रत्न मिले।

चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी। तीनों लोकों के विश्वविख्यात स्वामी।

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥

मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥

तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥

और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥

ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
बचाओ, बचाओ, विजय, कष्ट निवारणकर्ता। त्रिविध कष्टों तथा जन्म और मृत्यु के बंधन का नाश करने वाला।

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥

ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
बिना पुत्र और बिना संपत्ति के. अंधा बहरा कोढ़ी अत्यंत गरीब

विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥

पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥

बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥

प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥

करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥

जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥

भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥

बिन दृष्टि व्याकुल अधिकारी। आप ही भारी कष्ट सहने वाले हैं।

नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥

रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥

केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥

दोहा

दुखों का नाश करने वाली, सभी भयों का नाश करने वाली। जयति जयति जय लक्ष्मी, शत्रु का नाश करो।

रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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