नई दिल्ली. क्रिकेट आज के समय में सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा उद्योग बन चुका है. इस वैश्विक खेल अर्थशास्त्र के केंद्र में केवल एक ही नाम सबसे ऊपर चमकता है बीसीसीआई. एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने क्रिकेट जगत के वित्तीय समीकरणों की एक ऐसी तस्वीर पेश की है जो हैरान करने वाली भी है और भारतीय क्रिकेट के दबदबे को पूरी तरह स्पष्ट भी करती है. आंकड़े बताते हैं कि बीसीसीआई आर्थिक मजबूती के मामले में दुनिया भर के बाकी सभी क्रिकेट बोर्ड से कोसों आगे निकल चुका है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई (BCCI) की कुल अनुमानित नेटवर्थ लगभग 18,760 करोड़ रुपये है. यह आंकड़ा अपने आप में इतना बड़ा है कि खेल जगत के अन्य बड़े बोर्ड इसके सामने बहुत छोटे नजर आते हैं. यदि दुनिया के अन्य नौ प्रमुख क्रिकेट बोर्ड्स (ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, पाकिस्तान, बांग्लादेश, साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे, श्रीलंका, वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड) की कुल नेटवर्थ को आपस में जोड़ दिया जाए, तो वह लगभग 3,113 करोड़ रुपये बैठती है. यानी दुनिया के बाकी नौ देश मिलकर भी बीसीसीआई के करीब नहीं फटकते.
तुलना की जाए तो बीसीसीआई की यह संपत्ति अन्य नौ बोर्डों की संयुक्त ताकत से भी लगभग छह गुना अधिक है. अकेले बीसीसीआई और दूसरे नंबर पर काबिज क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ( Cricket Australia) के बीच का अंतर भी होश उड़ाने वाला है. ऑस्ट्रेलिया की नेटवर्थ लगभग 658 करोड़ रुपये है, जो बीसीसीआई की संपत्ति से लगभग 28 गुना कम है.
दुनिया भर के क्रिकेट बोर्ड्स की वित्तीय स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के प्रमुख क्रिकेट बोर्ड की वित्तीय स्थिति बेहद असमान है. इस कड़ी में भारत की नेटवर्थ 18,760 करोड़ रुपये है, जबकि दूसरे पायदान पर मौजूद ऑस्ट्रेलिया की नेटवर्थ 658 करोड़ रुपये है. इसके बाद इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड 492 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर आता है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पास लगभग 458 करोड़ रुपये हैं, वहीं पड़ोसी देश बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की नेटवर्थ 425 करोड़ रुपये आंकी गई है.
साउथ अफ्रीका क्रिकेट बोर्ड के पास 392 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जबकि जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड की कुल नेटवर्थ 317 करोड़ रुपये है. श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड की स्थिति 166 करोड़ रुपये पर है और वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड की नेटवर्थ 125 करोड़ रुपये दर्ज की गई है. इस लिस्ट में सबसे नीचे न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड है, जिसके पास लगभग 80 करोड़ रुपये की संपत्ति है. इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि भारत के अलावा बाकी सभी देशों के क्रिकेट बोर्ड के वित्तीय संसाधन सीमित हैं.
आईसीसी की कमाई और भारत का बड़ा बाजार
क्रिकेट के वैश्विक नियामक यानी इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) की कमाई में भी भारत का योगदान सबसे अहम और निर्णायक माना जाता है. आईसीसी के रेवेन्यू शेयर में अकेले भारत का हिस्सा 38.50 प्रतिशत है, जो इसे सबसे बड़ा बाजार बनाता है अन्य देशों के हिस्सों पर नजर डालें तो आईसीसी की कमाई में इंग्लैंड को 6.89 प्रतिशत, ऑस्ट्रेलिया को 6.25 प्रतिशत और पाकिस्तान को 5.75 प्रतिशत हिस्सा मिलता है. इसके बाद न्यूजीलैंड को 4.73 प्रतिशत, वेस्टइंडीज को 4.58 प्रतिशत, श्रीलंका को 4.52 प्रतिशत और बांग्लादेश को 4.46 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त होता है. सूची में आगे बढ़ते हुए साउथ अफ्रीका को 4.37 प्रतिशत, जिम्बाब्वे को 2.94 प्रतिशत और अफगानिस्तान को 2.80 प्रतिशत का हिस्सा मिलता है.
इन आंकड़ों से यह बात पूरी तरह साफ हो जाती है कि आईसीसी और वैश्विक क्रिकेट का पहिया मुख्य रूप से भारतीय बाजार और दर्शकों के दम पर ही घूमता है. भारत में क्रिकेट को लेकर जो दीवानगी है और ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से जो भारी-भरकम राजस्व प्राप्त होता है, वही बीसीसीआई को आज इस अद्वितीय मुकाम पर ले आया है.


