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Sharad Purnima 2026 Live Updates: आज शरद पूर्णिमा पर बरसेगा अमृत, जानें पूजा विधि, कथा, खीर रखने का समय, चंद्र दर्शन और हर बड़ी अपडेट

Author: Ajay Kumar

Published: 25-10-2026, 3:13 AM

शरद पूर्णिमा को हिंदू धर्म में बेहद खास दिन माना जाता है। साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जा रही है। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सुबह 11 बजकर 57 मिनट से होगी। रात्रि के समय पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को ही है इसलिए व्रत इस दिन रखा जाएगा और रात्रि के समय माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा की जाएगी। ऐसे में आइए जान लेते हैं शरद पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि, कथा, खीर रखने का समय आदि।

शरद पूर्णिमा के दिन पूजा की विधि

  • शरद पूर्णिमा की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थल की सफाई करें और यहां चौकी रखें या घर के ईशान कोण में भी आप चौकी रख सकते हैं।
  • चौकी पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर रखें।
  • पूजा के लिए रोली, चंदन, पीले/लाल फूल, अक्षत, दीप, पान, सुपारी, फल आदि भी आपको रखने चाहिए।
  • सबसे पहले गणेश जी की वंदना करें। इसके बाद माता लक्ष्मी के मंत्रों का जप करें।
  • माता लक्ष्मी के भोग के लिए इस दिन खीर अवश्य बनाएं।
  • अब शरद पूर्णिमा की कथा का पाठ करें।
  • अंत में माता लक्ष्मी की आरती भी आपको अवश्य पढ़नी चाहिए।
  • इसके बाद खीर को प्रसाद के रूप में वितरित आप कर सकते हैं।
  • शरद पूर्णिमा की मुख्य पूजा सूर्यास्त के बाद की जाती है, हालांकि आप सुबह और शाम दोनों समय पूजा कर सकते हैं।

शरद पूर्णिमा शुभ पूजन मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:56 मिनट से 05:46 मिनट तक
  • सायाह्न सन्ध्या मुहूर्त: शाम 06:09 मिनट से 07:24 मिनट तक
  • अमृत काल : शाम 05:05 मिनट से 06:36 मिनट तक
  • निशीथ काल में माता लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त: रात 11:40 बजे से रात 12:31 बजे तक

शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

भारत के कुछ राज्यों में शरद पूर्णिमा को कोजागर या कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। खासकर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा-आराधना भक्तों के द्वारा की जाती है। कोजागरी का अर्थ होता है- कौन जाग रहा है? मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में माता लक्ष्मी संसार में भ्रमण हेतु निकलती हैं और जो भी भक्त उन्हें जागता हुआ मिलता है देवी मां उसको शुभ फल प्रदान करती है और धन-धान्य से भक्त को संपन्न करती हैं। रात्रिकाल में जागरण करने के कारण ही इस शरद पूर्णिमा का नाम कोजगारी पूर्णिमा भी है।



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Author: Ajay Kumar

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