अहोई अष्टमी का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और उज्जवल भविष्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस पावन अवसर पर अहोई माता की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस पर्व को अहोई आठे के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यह व्रत तारों को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण होता है। इससे पहले, शाम के समय अहोई माता की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त और आपके शहर में तारों को अर्घ्य देने का सही समय क्या रहेगा।
पंचांग के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:36 बजे से 06:54 बजे तक रहेगा। वहीं तारों को देखने और अर्घ्य देने का समय शाम 06:00 बजे के आसपास रहेगा। आइए, अब प्रमुख शहरों के अनुसार अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त और तारों को अर्घ्य देने का सटीक समय जानते हैं:
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त 2026
| शहर का नाम | पूजा मुहूर्त | तारों का समय |
| नई दिल्ली | 05:36 अपराह्न से 06:54 अपराह्न तक | 06:00 अपराह्न |
| नोएडा | 05:36 अपराह्न से 06:53 अपराह्न तक | 05:48 अपराह्न |
| कोलकाता | 04:59 अपराह्न से 06:15 अपराह्न तक | 05:22 अपराह्न |
| लखनऊ | 05:24 अपराह्न से 06:41 अपराह्न तक | 05:48 अपराह्न |
| चेन्नई | 05:42 अपराह्न से 06:56 अपराह्न तक | 06:04 अपराह्न |
| हैदराबाद | 05:45 अपराह्न से 07:00 अपराह्न तक | 06:07 अपराह्न |
| अहमदाबाद | 06:02 अपराह्न से 07:18 अपराह्न तक | 06:25 अपराह्न |
| सूरत | 06:03 अपराह्न से 07:19 अपराह्न तक | 06:26 अपराह्न |
| पुणे | 06:02 अपराह्न से 07:17 अपराह्न तक | 06:24 अपराह्न |
| जयपुर | 05:44 अपराह्न से 07:01 अपराह्न तक | 06:08 अपराह्न |
| चंडीगढ़ | 05:35 अपराह्न से 06:53 अपराह्न तक | 06:00 अपराह्न |
| भोपाल | 05:42 अपराह्न से 06:59 अपराह्न तक | 06:05 अपराह्न |
| मथुरा | 05:36 अपराह्न से 06:53 अपराह्न तक | 06:00 अपराह्न |
| वृंदावन | 05:36 अपराह्न से 06:53 अपराह्न तक | 06:00 अपराह्न |
| आगरा | 05:35 अपराह्न से 06:52 अपराह्न तक | 05:59 अपराह्न |
| वाराणसी | 05:17 अपराह्न से 06:34 अपराह्न तक | 05:41 अपराह्न |
| गाजियाबाद | 05:35 अपराह्न से 06:53 अपराह्न तक | 06:00 अपराह्न |
| मुंबई | 06:05 अपराह्न से 07:20 अपराह्न तक | 06:28 अपराह्न |
अहोई अष्टमी पूजा विधि
- अहोई अष्टमी की पूजा के लिए अहोई माता का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
- दीवार या कागज पर मिट्टी, गेरू या रंग से सप्त ऋषियों, अहोई माता, सेई और सेई के बच्चों का चित्र बनाएं।
- पूजा के स्थान पर जल से भरा कलश, रोली, अगरबत्ती, फूल, दूध, चावल, दीपक, मिठाई, और गेहूं के दाने रखें।
- अहोई माता के सामने घी दीपक जलाएं।
- माता को फूल चढ़ाएं। साथ ही भोग लगाएं।
- अहोई माता की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- फिर शाम में तारों को जल अर्पित करके अपना व्रत खोल लें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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