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पितृपक्ष में मृत्यु: मोक्ष का मार्ग या सिर्फ एक संयोग? जानिए गरुड़ पुराण में क्या लिखा है

Author: Ajay Kumar

Published: 08-10-2026, 7:05 AM

पितृ पक्ष चल रहा है जिसका समापन 10 अक्टूबर को होगा। यह समय पूर्वजों के श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कहते हैं इस अवधि में पितृगण पृथ्वीलोक पर अपने परिवार वालों से मिलने आते हैं। ऐसे में जो कोई भी इस दौरान अपने पितरों का सच्चे मन से श्राद्ध और तर्पण करता है उसके ऊपर उसके पूर्वजों की विशेष कृपा बरसती है। पितृ पक्ष को लेकर कई तरह के सवाल भी लोगों के मन में रहते हैं जिनमें से एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या पितृ पक्ष में मृत्यु होने से आत्मा को मोक्ष मिल जाता है? क्या इस बारे में गरुड़ पुराण में कुछ कहा गया है? यहां हम इसी बारे में आपको बताएंगे।

पितृ पक्ष में मृत्यु को लेकर गरुड़ पुराण का क्या कहना है?

ऐसा अक्सर सुनने में आता है कि पितृ पक्ष में मृत्यु होने से आत्मा को मोक्ष मिल जाता है। लेकिन इस संबंध में हमारे शास्त्रों में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, किसी भी आत्मा को मोक्ष पाने के लिए सबसे जरूरी उसके अच्छे कर्म और पुण्य कार्य होते हैं। केवल किसी विशेष तिथि या पक्ष में मृत्यु होने मात्र से किसी को मोक्ष नहीं मिल जाता है। शास्त्रों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के कर्म अच्छे हैं और उसने अपने जीवनकाल में कभी कोई ऐसा काम नहीं किया है जिससे किसी को हानि पहुंची हो, तब ही उस व्यक्ति की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

क्या कहती हैं लोक मान्यताएं?

लोक-मान्यताओं में पितृ पक्ष में मृत्यु होना खास माना जाता है क्योंकि इस दौरान यमलोक के द्वार खुले होते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पितृ पक्ष में होती है तो ऐसा माना जाता है कि उसे लेने के लिए यमदूत नहीं, बल्कि उसके पितर आते हैं और वे उस व्यक्ति की आत्मा को सीधे स्वर्ग लोक ले जाते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दौरान मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति अपना पितृ ऋण चुका कर जाता है। लेकिन ये सब लोक मान्यताएं हैं शास्त्रों में इसका कहीं कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है।

पितृ पक्ष में मृत्यु होने पर क्या होते हैं अंतिम संस्कार के नियम?

कहते हैं यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पितृ पक्ष में हुई हो तो उसके अंतिम संस्कार में भी वहीं नियम लागू होंगे जो अन्य समय में मृत्यु होने पर होते हैं। पितृ पक्ष में मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति का श्राद्ध सामान्यतः उसकी मृत्यु की तिथि के अनुसार ही तीन साल बाद किया जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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