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राजधानी का वो प्रसिद्ध मंदिर जो बना आस्था का केंद्र, जानिए सरोजिनी नगर के श्रीविनायक मंदिर का इतिहास

Author: Ajay Kumar

Published: 07-10-2026, 9:32 AM

देश की राजधानी दिल्ली के सरोजनी नगर में स्थिति श्री विनायक मंदिर से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। यह मंदिर केवल दक्षिण भारतीय समुदाय के लिए ही नहीं बल्कि अन्य भक्तों के लिए खास है।  भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है और गणपति जी के शरण में आने से व्यक्ति के जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। दिल्ली में रहने वाले दक्षिण भारतीय समुदाय के लिए यह मंदिर लंबे समय से आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव का केंद्र रहा है। श्री विनायक मंदिर में सिद्धि-बुद्धि समेत कर्पगा विनायकर की उपासना दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार होती है।

दिल्ली श्रीविनायक मंदिर का इतिहास

दिल्ली में रहने वाले दक्षिण भारतीय समुदाय ने 1950 के दशक में महसूस किया कि राजधानी में भी एक मंदिर होना चाहिए, जिससे यहां रहने वाले भक्त अपने पारंपरिक तरीके से पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान कर सकें। इसके लिए दिल्ली के कुछ समाज-सेवियों और नागरिकों ने मिलकर ‘श्री विनायक मंदिर समिति’ बनाई। बाद में, 16 अप्रैल 1953 को इसे ‘रजिस्ट्रार ऑफ़ सोसाइटीज़, दिल्ली’ के पास रजिस्टर कराया गया। समिति का मुख्य काम दिल्ली में भगवान विनायक का मंदिर स्थापना करना था।

चंदे के पैसे से भगवान विनायक के लिए एक छोटा मंदिर बनाया गया, जिसमें ‘गर्भ-गृह’और उसके चारों ओर ‘प्राकारम’ (परिक्रमा पथ) था। कांची कामकोटि पीठम के जगद्गुरु पूज्य श्री परमाचार्य जी और श्रृंगेरी शारदा पीठम के जगद्गुरु श्री शंकराचार्य स्वामी जी के आशीर्वाद से, दक्षिण भारत के शिल्पकारों (स्थपतियों) द्वारा गढ़ी गई श्री सिद्धि बुद्धि समेत कर्पक विनायक की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा 24 अगस्त 1961 को तत्कालीन विनय नगर (जिसे अब सरोजिनी नगर के नाम से जाना जाता है) में की गई।

देश के विभिन्न भागों से आए अनेक भक्तों की उपस्थिति में पारंपरिक दक्षिण भारतीय शैली में कुंभाभिषेकम संपन्न किया गया। इस विनम्र शुरुआत के बाद से श्रद्धालु की अटूट भक्ति और सहयोग से यह मंदिर लगातार बढ़ता गया। बाद में मंदिर परिसर में उचित स्थानों पर भगवान हनुमान और नवग्रहों की मूर्तियां स्थापित की गईं। दैनिक पारंपरिक अभिषेकम और पूजा के अलावा महत्वपूर्ण अवसरों पर विशेष अभिषेक, होमम (हवन) और प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं जो दिल्ली के श्रद्धालु वर्ग को आकर्षित करती हैं।

स्थानीय भक्तों की इच्छा को पूरा करने के लिए जून 1983 में भगवान शिव के एक मंदिर की भी प्राण-प्रतिष्ठा की गई। यहां नर्मदा नदी से लाए गए स्वयंभू शिवलिंग — ओंकारेश्वर को पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की नक्काशीदार मूर्तियों और नंदीकेश्वर के साथ स्थापित किया गया है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सार्वजनिक जीवन में अपने 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर उन्होंने दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर पीएम मोदी ने देश की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और संकल्प को दोहराया। प्रधानमंत्री ने मंदिर में विधि-विधान से पूजा की और देश की समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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