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8 अक्टूबर को रखा जाएगा गुरु प्रदोष का व्रत, शिवलिंग पर चढ़ाएं ये 5 चीजें, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

Author: Ajay Kumar

Published: 07-10-2026, 3:18 AM

प्रदोष का व्रत भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने के साथ ही विधिपूर्वक पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत करने का विधान है। धार्मिक  मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। प्रदोष का व्रत सप्ताह के जिस दिन पड़ता है उसका नाम उसी हिसाब से रखा जाता है। अक्टूबर का पहला प्रदोष 8 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा इसलिए इसे गुरु प्रदोष कहेंगे। गुरु प्रदोष व्रत के दिन महादेव को ये 5 चीजों अर्पित करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

गुरु प्रदोष के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये 5 चीजें

  1. बेलपत्र- भगवान शिव को बेलपत्र अति प्रिय है इसलिए गुरु प्रदोष के दिन शिवजी को बेलपत्र जरूर अर्पित करें। इससे भक्तों की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।

  2. चंदन- गुरु प्रदोष के दिन शिवलिंग पर आठ जगह पीला चंदन लगाएं। धार्मिक मान्यता है कि पीला चंदन चढ़ाने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।

  3. शहद- गुरु प्रदोष के दिन शिवलिंग पर शहद जरूर चढ़ाएं। माना जाता है कि शिवजी को शहद चढ़ाने से व्यक्ति को भाग्य का साथ मिलता है।

  4. कच्चा दूध- प्रदोष व्रत के दिन कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

  5. पंचामृ- प्रदोष के दिन शिवंलिग का पंचामृत से अभिषेक करना भी अत्यंत ही शुभ माना जाता है। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल मिलाकर बनाते हैं।

गुरु प्रदोष 2026 शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 7 अक्टूबर को रात 11 बजकर 16 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि का समापन 8 अक्टूबर को रात 10 बजकर 15 मिनट पर होगा। गुरु प्रदोष पूजा मुहूर्त शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।

गुरु प्रदोष व्रत महत्व

जब प्रदोष का दिन गुरुवार को पड़ता है तो इसे गुरु प्रदोष के नाम से जाना जाता है। गुरु प्रदोष को बृहस्पति प्रदोष भी कहा जाता है। गुरु प्रदोष का व्रत करने से ज्ञान, शिक्षा, धन, धर्म और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। विवाह, संतान, शिक्षक, ज्येष्ठ भ्राता, पिता, दान आदि का कारक भी बृहस्पति को ही माना जाता है। अतः इस दिन प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति उपरोक्त सभी क्षेत्रों में उन्नति होती है।यह व्रत विशेष रूप से आध्यात्मिक साधकों और विद्यार्थियों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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