करियर के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए मेहनत हर व्यक्ति को करनी पड़ती है। हालांकि, कई बार कड़ी मेहनत के बाद भी लोग मनचाही सफलता प्राप्त नहीं कर पाते। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो इसकी वजह करियर के लिए गलत जगह का चुनाव हो सकता है। ज्योतिष की मानें तो कुछ लोगों को जन्मस्थान के आसपास रहकर करियर-बिजनेस में सफलता प्राप्त होती है और कुछ लोगों को घर से बाहर जाकर। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि कुंडली देखकर कैसे पता चलता है कि घर के पास रहकर सफलता मिलेगी या घर से दूर जाने से।
कुंडली की ये ग्रह स्थितियां घर से दूर दिलाती हैं सफलता
- ज्योतिष की मानें तो द्वादश भाव को विदेश या जन्मभूमि से दूर स्थानों का भाव माना जाता है। वहीं करियर का भाव दसवां होता है। अगर कुंडली में दसवें और द्वादश भाव के स्वामियों के बीच संबंध है या दसवें और द्वादश भाव के स्वामी युति में हैं तो व्यक्ति को घर से दूर रहकर ही सफलता प्राप्त होती है।
- अगर नवम भाव और द्वादश भाव के स्वामी भी युति में हों या दोनों के बीच संबंध हो तो भाग्य का सितारा विदेशों में जाकर ही चमकता है।
- कुंडली का द्वादश भाव मजबूत हो यानि इस भाव का स्वामी अच्छी अवस्था में हो और चतुर्थ भाव या चतुर्देश कमजोर अवस्था में हो तो विदेशों में जाकर उन्नति मिलने के चांस ज्यादा रहते हैं।
- अगर कुंडली के दसवें भाव में मेष, कर्क, तुला या मकर राशि हो तो व्यक्ति के पांव एक जगह पर नहीं टिकते और अक्सर ऐसे लोगों को घर से दूर रहकर ही करियर में स्थिरता मिलती है।
कुंडली की ये ग्रह स्थितियां जन्मस्थान में दिलाती हैं सफलता
- जिस व्यक्ति की कुंडली में चौथा भाव सुख का भाव बेहद मजबूत हो उसे घर के आसपास रहकर ही करियर क्षेत्र में सफलता मिलती है। चतुर्थ भाव पर शुभ ग्रहों गुरु, शुक्र की दृष्टि होने पर भी करियर घर के आसपास रहकर ही संवरता है।
- पहले या दसवें भाव में स्थिर राशियां वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ हो तो घर के पास रहने से व्यक्ति को करियर के क्षेत्र में जबरदस्त सफलता मिल सकती है। ऐसे लोग अपना काम शुरू करके भी सफल हो सकते हैं।
- अगर कुंडली में चतुर्थ भाव (सुख भाव) और दशवें भाव (कर्म भाव)के स्वामी आपस में युति बनाते हों या किसी भी तरह से संबंध बनाते हों तो घर के पास रहने से व्यक्ति को मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही पेशेवर जीवन में भी व्यक्ति उन्नति कर सकता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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