कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने वार्षिक वित्तीय विवरण दाखिल करने की समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है।
इसके अलावा, एक परिपत्र के अनुसार, कंपनियां अपना वार्षिक रिटर्न 31 जनवरी, 2027 तक मंत्रालय को जमा कर सकती हैं।
समय सीमा का विस्तार हितधारकों के प्रतिनिधित्व के बाद किया गया है क्योंकि उन्हें एमसीए 21 पोर्टल के माध्यम से वार्षिक वैधानिक फाइलिंग जमा करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
24 अक्टूबर के सर्कुलर के अनुसार, मंत्रालय ने कहा कि प्राप्त अभ्यावेदन को ध्यान में रखते हुए और कंपनियों को अपनी वार्षिक वैधानिक फाइलिंग को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए, अतिरिक्त शुल्क का भुगतान किए बिना समय सीमा बढ़ा दी गई है।
अब, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ई-फॉर्म AOC-4, AOC-4 (CFS), AOC-4 (XBRL), AOC-4 NBFC (Ind AS) और AOC-4 CFS NBFC (Ind AS) में वार्षिक वित्तीय विवरण 31 दिसंबर, 2026 तक दाखिल किए जा सकते हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ई-फॉर्म एमजीटी-7 और एमजीटी-7ए में वार्षिक रिटर्न 31 जनवरी 2027 तक जमा किया जा सकता है।
आम तौर पर, वार्षिक वित्तीय विवरण वार्षिक आम बैठकें (एजीएम) पूरा करने के 30 दिनों के भीतर जमा करना होता है और वार्षिक रिटर्न के मामले में, समय अवधि 60 दिन है।
परिपत्र जारी होने से पहले, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए वार्षिक वित्तीय विवरण और वार्षिक वित्तीय रिटर्न जमा करने की समय सीमा क्रमशः 31 अक्टूबर और 30 नवंबर, 2026 थी।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि परिपत्र को “अधिनियम के तहत कंपनियों द्वारा एजीएम (वार्षिक आम बैठक) आयोजित करने के लिए वैधानिक समय का कोई विस्तार प्रदान करने वाला नहीं माना जाएगा और जिन कंपनियों ने प्रासंगिक वैधानिक समयसीमा का पालन नहीं किया है, वे अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत उत्तरदायी होंगी”।
कंपनी अधिनियम के तहत, संस्थाओं को एमसीए 21 पोर्टल के माध्यम से वैधानिक फाइलिंग जमा करनी होगी। हाल ही में, हितधारकों को पोर्टल का उपयोग करने में समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) ने रविवार को कहा कि विस्तारित समयसीमा एमसीए 21 वी3 पोर्टल पर तकनीकी परिवर्तन को नेविगेट करने के लिए महत्वपूर्ण राहत प्रदान करती है।
एक बयान में कहा गया, समय पर राहत मंत्रालय के हितधारक-केंद्रित दृष्टिकोण और व्यापार करने में आसानी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मंत्रालय कंपनी अधिनियम लागू करता है।


