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उपांग ललिता व्रत पर कैसे करें मां ललिता की पूजा? जानें नवरात्रि की तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि

Author: Ajay Kumar

Published: 14-10-2026, 8:18 PM

शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन उपांग ललिता व्रत, जिसे ललिता पंचमी भी कहा जाता है, रखा जाता है। यह दिन देवी ललिता की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। देवी ललिता को त्रिपुरा सुंदरी, षोडशी और राजेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि आती है। जानिए पंचमी तिथि कब से कब तक रहेगी और ललिता पंचमी की पूजा कैसे करें।

कब है ललिता पंचमी 2026?

शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन उपांग ललिता व्रत किया जाता है। साल 2026 में ललिता पंचमी का व्रत गुरुवार, 15 अक्टूबर को रखा जाएगा। पंचमी तिथि 15 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 13 मिनट से शुरू होगी और 16 अक्टूबर को दोपहर बाद 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से देवी ललिता की पूजा करते हैं।

देवी ललिता का महत्व

सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार, देवी ललिता सौंदर्य, शक्ति, समृद्धि और सौभाग्य की देवी हैं। पौराणिक कथा में वर्णित है कि कामदेव के भस्म होने के बाद उसकी राख से भांडासुर नामक दैत्य उत्पन्न हुआ था। उसने देवताओं पर अत्याचार करना शुरू कर दिया, उस दैत्य से मुक्ति दिलाने के लिए देवी ललिता का प्राकट्य हुआ और उन्होंने भांडासुर का वध किया। मान्यता है कि ललिता पंचमी का व्रत नवविवाहित महिलाओं और परिवार के सुख-शांति, सौभाग्य, विद्या, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

उपांग ललिता व्रत पूजा विधि

  1. ललिता पंचमी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
  2. इसके बाद पूजा स्थान या घर के ईशान कोण में चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां ललिता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। शुद्ध घी का दीपक जलाकर पूजा का संकल्प लें।
  3. फिर मां को लाल या गुलाबी फूल, सुगंध, रोली, कुमकुम, अक्षत, इत्र, मौसमी फल और सात्विक प्रसाद चढ़ाएं।
  4. नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता के साथ देवी ललिता और भगवान शिव की आराधना भी की जाती है।
  5. इस दिन ललिता सहस्रनाम या ललिता त्रिशती का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  6. आर्थिक समस्याओं से मुक्ति और समृद्धि की कामना के लिए मां ललिता के मूल मंत्र का यथाशक्ति जाप किया जा सकता है। मंत्र:ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं श्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नमः
  7. साथ ही शांत मन से “ओम श्री ललितायै नमः” मंत्र का जाप करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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