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27 अक्टूबर 2026 का पंचांग: मंगलवार को रखा जाएगा अशून्य शयन व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Author: Ajay Kumar

Published: 26-10-2026, 10:44 AM

27 अक्टूबर को कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और मंगलवार का दिन है। द्वितीया तिथि मंगलवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। 27 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 53 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा, उसके बाद व्यतिपात योग लग जायेगा। साथ ही मंगलवार को दोपहर बाद 3 बजकर 40 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 27 अक्टूबर को अशून्य शयन व्रत है। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए मंगलवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।

27 अक्टूबर 2026 का पंचांग

  • कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि- 27 अक्टूबर 2026 को  पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 8 मिनट तक
  • भरणी नक्षत्र- 27 अक्टूबर 2026 को दोपहर बाद 3 बजकर 40 मिनट तक
  • सिद्धि योग- 27 अक्टूबर 2026 को  सुबह 10 बजकर 53 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा , उसके बाद व्यतिपात योग लग जायेगा
  • 27 अक्टूबर विशेष- अशून्य शयन व्रत

27 अक्टूबर 2026 का शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:47 ए एम से 05:38 ए एम
  • प्रातः संध्या- 05:13 ए एम से 06:29 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 01:57 पी एम से 02:41 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 05:40 पी एम से 06:06 पी एम
  • सायाह्न संध्या- 05:40 पी एम से 06:57 पी एम
  • अमृत काल- 11:15 ए एम से 12:43 पी एम
  • निशिता मुहूर्त- 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 28
  • त्रिपुष्कर योग- 03:39 पी एम से 04:06 ए एम, अक्टूबर 28
  • सर्वार्थ सिद्धि योग- 03:39 पी एम से 06:30 ए एम, अक्टूबर 28

राहुकाल का समय

  • दिल्ली- दोपहर 02:53 से शाम 04:16 तक
  • मुंबई- दोपहर बाद 03:15 से शाम 04:42 तक
  • चंडीगढ़- दोपहर 02:53 से शाम 04:16 तक
  • लखनऊ- दोपहर 02:39 से शाम 04:03 तक
  • भोपाल- दोपहर 02:54 से शाम 04:20 तक
  • कोलकाता- दोपहर 02:11 से दोपहर बाद 03:37 तक
  • अहमदाबाद- दोपहर बाद 03:14 से शाम 04:39 तक
  • चेन्नई- दोपहर 02:48 से शाम 04:16 तक

सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय- सुबह 06:29 बजे
  • सूर्यास्त- शाम 05:40 बजे

अशून्य शयन व्रत का महत्व

चातुर्मास के दौरान पड़ने वाले प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीया को अशून्य शयन व्रत किया जाता है। कार्तिक चातुर्मास के दौरान पड़ने वाला आखिरी महीना है। आपको बता दें कि व्रत पुरुषों द्वारा किया जाता है। इस व्रत को करने से जीवन भर पति-पत्नी का साथ बना रहता है और रिश्तों में मजबूती आती है। दरअसल अशून्य शयन द्वितीया का अर्थ ही होता है कि अकेले न सोना पड़े यानि लंबे समय तक दोनों का साथ बना रहे। अतः आज के दिन पति इस व्रत को करके अपने जीवनसाथी का साथ सुनिश्चित कर सकता है।

इस दिन अशून्य शयन द्वितीया व्रत में मां लक्ष्मी और श्री विष्णु की पूजा का विधान है।  अशून्य शयन  के दिन पूरा दिन व्रत करके शाम को चंद्रोदय होने पर, चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है । आपको बता दें कि 27 अक्टूबर को  चंद्रोदय शाम 6 बजकर 19 मिनट पर होगा।

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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