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16 अक्टूबर 2026 का पंचांग: शुक्रवार को नवरात्रि का छठा दिन, नोट कर लें षष्ठी पूजा का मुहूर्त और राहुकाल का समय

Author: Ajay Kumar

Published: 15-10-2026, 1:39 PM

16 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और शुक्रवार का दिन है। षष्ठी तिथि शुक्रवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के शनिवार सुबह 5 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। 16 अक्टूबर को नवरात्रि का छठवां दिन है। शुक्रवार रात 10 बजकर 6 मिनट तक शोभन योग रहेगा। साथ ही 16 अक्टूबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के शनिवार सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक मूल नक्षत्र रहेगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए शुक्रवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।

16 अक्टूबर 2026 का पंचांग

  • आश्विन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि- 16अक्टूबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के शनिवार सुबह 5 बजकर 55 मिनट तक
  • शोभन योग- 16 अक्टूबर को रात 10 बजकर 6 मिनट तक
  • मूल नक्षत्र- 16 अक्टूबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के कल सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक
  • 16 अक्टूबर विशेष- नवरात्रि का छठवां दिन (षष्ठी पूजा)

16 अक्टूबर 2026 का शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:55 ए एम से 05:44 ए एम
  • प्रातः संध्या- 05:19 ए एम से 06:33 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:00 पी एम से 12:47 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:15 पी एम से 06:40 पी एम
  • सायाह्न संध्या- 06:15 पी एम से 07:29 पी एम

राहुकाल का समय

  1. दिल्ली- सुबह 10:41 से दोपहर 12:07 तक
  2. मुंबई- सुबह 10:56 से दोपहर 12:24 तक
  3. चंडीगढ़- सुबह 10:43 से दोपहर 12:08 तक
  4. लखनऊ- सुबह 10:26 से दोपहर पहले 11:52 तक
  5. भोपाल- सुबह 10:39 से दोपहर 12:06 तक
  6. कोलकाता- सुबह 09:55 से दोपहर पहले 11:22 तक
  7. अहमदाबाद- सुबह 10:58 से दोपहर 12:25 तक
  8. चेन्नई- सुबह 10:26 से दोपहर पहले 11:54 तक

सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय- सुबह 06:21 बजे
  • सूर्यास्त- शाम 05:50 बजे

नवरात्रि का छठा दिन- मां कात्यायनी पूजा महत्व

शुक्रवार को शारदीय नवरात्रि का छठवां दिन रहेगा, जिसे षष्ठी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,  ऋषि कात्यायन के यहां जन्म लेने के कारण देवी मां को कात्यायनी के नाम से जाना जाता है। मां कात्यायनी की उपासना से व्यक्ति को किसी प्रकार का भय या डर नहीं रहता और उसे किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ता है।

नवरात्रि षष्ठी पूजा का महत्व

बंगाल की परंपरा में षष्ठी के दिन देवी का बोधन और आमंत्रण किया जाता है। इसी दिन से दुर्गा पूजा का मुख्य चरण आरंभ होता है। बता दें कि दुर्गा पूजा में मुख्य रूप से महिषासुरमर्दिनी रूप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस प्रतिमा में मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, कार्तिक, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती भी विराजमान होते हैं।

नवरात्रि षष्ठी पूजा 2026 बिल्व निमंत्रण मुहूर्त

  • षष्ठी तिथि प्रारंभ – अक्टूबर 16, 2026 को 03:25 ए एम बजे
  • षष्ठी तिथि समाप्त – अक्टूबर 17, 2026 को 05:54 ए एम बजे
  • बिल्व निमंत्रण मुहूर्त – 03:55 पी एम से 06:15 पी एम

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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Tech Enthusiast | Law & Accounting Expert | Web Developer | Blogger | Tally & SAP Specialist

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