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14 अक्टूबर 2026 का पंचांग: बुधवार के दिन होगी मां कूष्मांडा की आराधना, नोट करें नवरात्रि के चौथे दिन का पूजा मुहूर्त और राहुकाल टाइम

Author: Ajay Kumar

Published: 13-10-2026, 12:39 PM

14 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और बुधवार का दिन है। कल चतुर्थी तिथि देर रात 1 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। कल नवरात्र का चौथा दिन है, जो मां कूष्मांडा को समर्पित है। वहीं, कल रात 8 बजकर 39 मिनट तक आयुष्मान योग रहेगा। साथ ही कल 14 अक्टूबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 3 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा कल वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत किया जाएगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए बुधवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।

14 अक्टूबर 2026 का पंचांग

  • आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि – 14 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 56 मिनट तक
  • आयुष्मान योग- 14 अक्टूबर को रात 8 बजकर 39 मिनट तक
  • अनुराधा नक्षत्र- 14 अक्टूबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 3 मिनट तक
  • 14 अक्टूबर विशेष- वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत, नवरात्र का चौथा दिन

14 अक्टूबर 2026 शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:41 ए एम से 05:31 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 05:06 ए एम से 06:21 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
  • विजय मुहूर्त- 02:02 पी एम से 02:48 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 05:53 पी एम से 06:18 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 05:53 पी एम से 07:08 पी एम
  • अमृत काल- 04:38 पी एम से 06:23 पी एम

राहुकाल का समय

  • दिल्ली- दोपहर 12:07 से दोपहर 01:33 तक
  • मुंबई- दोपहर 12:25 से दोपहर 01:53 तक
  • चंडीगढ़- दोपहर 12:09 से दोपहर 01:35 तक
  • लखनऊ- दोपहर पहले 11:52 से दोपहर 01:19 तक
  • भोपाल- दोपहर 12:06 से दोपहर 01:33 तक
  • कोलकाता- दोपहर पहले 11:23 से दोपहर 12:50 तक
  • अहमदाबाद- दोपहर 12:25 से दोपहर 01:53 तक
  • चेन्नई- दोपहर पहले 11:55 से दोपहर 01:24 तक

सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय- सुबह 06:21 बजे
  • सूर्यास्त- शाम 05:53 बजे

कल के दिन की विशेष बात

नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। अपनी मंद हंसी से ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कुष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। संस्कृत भाषा में कुष्माण्डा कुम्हड़े को कहा जाता है और कुम्हड़े की बलि इन्हें बहुत प्रिय है, जिसके कारण भी इन्हें कुष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। माता का वाहन सिंह है | मां कुष्माण्डा की आठ भुजाएं होने के कारण इन्हें अष्टभुजा वाली भी कहा जाता है । इनके सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र तथा गदा नजर आता है तो आठवें हाथ में जप की माला। कहते हैं इस जप की माला में सभी सिद्धियों और निधियों का संग्रह है।

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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Tech Enthusiast | Law & Accounting Expert | Web Developer | Blogger | Tally & SAP Specialist

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