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11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि: घटस्थापना और दुर्गा पूजा सामग्री की A to Z पूरी लिस्ट करें नोट

Author: Ajay Kumar

Published: 09-10-2026, 12:43 PM

शारदीय नवरात्रि का त्योहार 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा की चौकी सजायी जाती है। जिस पर माता रानी की प्रतिमा के साथ-साथ एक कलश भी स्थापित किया जाता है। साथ ही जौ भी उगायी जाती है तो वहीं कई लोग इस दिन अखंड ज्योति भी जलाते हैं। चलिए जानते हैं नवरात्रि पूजन में किन-किन सामग्रियों की जरूरत होती है।

नवरात्रि पूजा सामग्री

  • मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति
  • गणेश जी की मूर्ति
  • चौकी
  • आसन
  • लाल वस्त्र
  • कलावा या मौलीफूल
  • माला
  • पूर्ण श्रृंगार का सामान
  • प्रसाद के लिए ऋतुफल
  • माता को चढ़ाने के लिए लाल चुनरी
  • दुर्गा सप्तशती
  • नारियल
  • धुप
  • अगरबत्ती
  • दीपक
  • पान का पत्ता
  • सुपारी
  • आरती की थाली
  • फूल
  • बाती और घी से भरा दीपक
  • घंटी
  • कुमकुम
  • चन्दन
  • हल्दी
  • अक्षत
  • छोटा जलपात्र
  • कर्पूर
  • अष्टदल कमल
  • कुमकुम और हल्दी से रंगे चावल

घटस्थापना सामग्री लिस्ट

  • मिट्टी या तांबे का कलश
  • शुद्ध जल
  • सिक्का
  • अक्षत
  • नारियल
  • एक साथ जुड़े हुए 8 आम के पत्ते
  • दो साबुत सुपारी
  • दो इलायची
  • एक हल्दी की गांठ
  • लाल कलावा या मौली
  • दो साबुत लौंग
  • नारियल पर बांधने के लिए छोटी लाल चुनरी

जौ बोने के लिए सामग्री

  • मिट्टी का बड़ा कटोरा
  • कलावा या मौली
  • जौ और गेहूं के दाने
  • साफ जल
  • साफ काली मिट्टी

नवरात्रि पूजन कैसे करें?

  • नवरात्रि पूजन के लिए सबसे पहले एक साफ स्थान पर चौकी लगाएं। फिर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
  • उस चौकी पर कुछ अक्षत रखें और फिर इसपर देवी दुर्गा जी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • इसके बाद एक लोटे या कलश में शुद्ध जल भर लें और उसके अंदर एक सिक्का और सुपारी डालें।
  • फिर उस पर एक लाल चुनरी में बांधकर नारियल रखें।
  • फिर पूजा स्थान पर मां अंबे और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें और बराबर में कलश रखें।
  • भगवान गणेश और देवी दुर्गा पर फूल से शुद्ध जल का छिड़काव करें।
  • फिर आप चाहें तो अखंड ज्योत भी जला सकते हैं। बाकी एक दीपक अलग से आरती के लिए भी जलाना है।
  • इसके बाद भगवान गणेश, माता रानी, कलश और दीपक को हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाएं।
  • विधि विधान पूजा करने के बाद श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।
  • भोग में अपनी श्रद्धानुसार बताशे, मिश्री और फल रखें।
  • माता के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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