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11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू, कलश स्थापना में इन नियमों का रखें ध्यान, जानें मंत्र सहित पूरी विधि

Author: Ajay Kumar

Published: 09-10-2026, 4:47 PM

नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा की पूजा के लिए कलश स्थापना की जाती है। कलश स्थापना के दौरान दिशा से लेकर जौ और शंख रखने, कलश में जल भरने और नारियल स्थापित करने तक कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। कलश स्थापना में एक छोटी सी गलती भी भारी पड़ सकती है, जैसे कलश के ऊपर दीपक जलाना सही है या गलत? कलश स्थापना में नारियल कहां रखें? आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए नवरात्रि में घट स्थापना से जुड़े जरूरी नियम।

कलश स्थापना की तैयारी

शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से हो रही हैजो 19 अक्टूबर 2026 तक चलेंगे। नवरात्र के पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौ शक्ति स्वरूपों की पूजा की जायेगी। नवरात्र के पहले दिन देवी मां के निमित्त कलश स्थापना की जाती है।

कलश स्थापना की सही विधि

ईशान कोण: सबसे पहले घर के ईशान कोण, यानी उत्तर-पूर्व दिशा के हिस्से की अच्छे से साफ-सफाई करके वहां पर जल छिड़ककर साफ मिट्टी या बालू बिछानी चाहिए। फिर उस पर जौ की परत बिछाएं और उसके ऊपर फिर साफ मिट्टी या बालू की परत बिछाकर उसका जलावशोषण करें। जलावशोषण का मतलब है कि उस मिट्टी की परत के पर जल छिड़कना चाहिए।

कलश स्थापना: अब उसके ऊपर मिट्टी या धातु के कलश की स्थापना करनी चाहिए। कलश को अच्छे से साफ, शुद्ध जल से भरें और उस कलश में एक सिक्का डाल दें। अगर संभव हो तो कलश के जल में पवित्र नदियों का जल भी जरूर मिलाना चाहिए। इसके बाद कलश के मुख पर अपना दाहिना हाथ रखकर यह मंत्र पढ़ें:

गंगा और यमुना तथा गोदावरी और सरस्वती।

हे नर्मदा सिंधु कावेरी इस जल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराओ

ये मंत्र पढ़ें और अगर मंत्र न बोल पाएं या ध्यान न रहे तो बिना मंत्र के ही गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु और कावेरी, पवित्र नदियों का ध्यान करते हुए उन नदियों के जल का आह्वान उस कलश में करना चाहिए और ऐसा भाव करना चाहिए कि सभी नदियों का जल उस कलश में आ जाए। पवित्र नदियों के साथ ही वरुण देवता का भी आह्वान करना चाहिए, ताकि वो उस कलश में अपना स्थान ग्रहण कर लें।

कलश पर रखें कटोरी और नारियल

इसके बाद कलश के मुख पर कलावा बांधिए और एक मिट्टी की कटोरी से कलश को ढक दें। अब ऊपर ढकी गई उस कटोरी में जौ भरिए। यदि जौ न हो तो चावल भी भर सकते हैं। इसके बाद एक जटा वाला नारियल लेकर उसे लाल कपड़े में लपेटकर ऊपर कलावे से बांध दें। फिर उस बंधे हुए नारियल को जौ या चावल से भरी हुई कटोरी के ऊपर स्थापित कर दीजिए।

कलश के ऊपर दीपक न जलाएं

कुछ लोग कलश के ऊपर रखी गई कटोरी में ही घी का दीपक जला लेते हैं। ऐसा करना उचित नहीं है। कलश का स्थान पूजा के उत्तर-पूर्व कोने में होता है, जबकि दीपक का स्थान दक्षिण-पूर्व कोने में होता है। लिहाजा कलश के ऊपर दीपक नहीं जलाना चाहिए।

शंख रखने का नियम

कुछ लोग कलश के ऊपर रखी कटोरी में चावल भरकर उसके ऊपर शंख स्थापित करते हैं। इसमें कोई परेशानी नहीं है, आप ऐसा कर सकते हैं। बशर्ते कि शंख दक्षिणावर्त होना चाहिए और उसका मुंह ऊपर की ओर रखना चाहिए और चोंच अपनी ओर करके रखनी चाहिए।

नवार्ण मंत्र का जाप

ये सब करते समय नवार्ण मंत्र अवश्य पढ़ना चाहिए। नवार्ण मंत्र है- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”। यहां एक बार फिर नवार्ण मंत्र के साथ पूरी कार्यविधि समझ लीजिए।

मंत्र के साथ ऐसे करें कलश स्थापना

  • सबसे पहले उत्तर-पूर्व कोने की सफाई करें और जल छिड़कते समय कहें -“ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • फिर कोने में मिट्टी या बालू बिछाएं और 5 बार मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • उसके ऊपर जौ बिछाएं और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • उसके ऊपर फिर मिट्टी या बालू बिछाएं और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • उसके ऊपर कलश रखें और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • कलश में जल भरें और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • उसमें सिक्का डालें और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • वरुण देव का आह्वाहन करें और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • कलश के मुख पर कलावा बांधें और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • कलश के ऊपर कटोरी रखें और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • उसमें चावल या जौ भरें और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • नारियल पर कपड़ा लपेटें और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • उसे कलावे से बांधें और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”
  • उस नारियल को जौ या चावल से भरी कटोरी पर रखें और मंत्र पढ़ें- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”

इस प्रकार सभी कार्यविधि चामुण्डा मंत्र (नवार्ण मंत्र) से पूरी की जानी चाहिए।

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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Tech Enthusiast | Law & Accounting Expert | Web Developer | Blogger | Tally & SAP Specialist

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