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माता कालरात्रि की कथा, नवरात्रि के सातवें दिन इसका पाठ करने से जीवन की विघ्न-बाधाएं होंगी दूर

Author: Ajay Kumar

Published: 17-10-2026, 2:24 AM

शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन माता दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। शारदीय नवरात्रि 2026 में माता कालरात्रि की पूजा 17 अक्टूबर को होगी। माता कालरात्रि को देवी पार्वती का उग्र स्वरूप माना जाता है। हालांकि, माता अपने भक्तों का सदा शुभ करती हैं और इसीलिए माता का एक नाम शुभंकरी भी है। माता दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा करने से भक्तों की मानोकामनाएं तो पूरी होती ही हैं साथ ही जीवन में आ रही विघ्न-बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है। नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर कालरात्रि माता की पूजा के साथ ही आपको माता से जुड़ी कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। आइए जान लेते हैं क्या है देवी कालरात्रि की कथा।

माता कालरात्रि की कथा

देवी भागवत पुराण के अनुसार, एक समय रक्तबीज नामक एक असुर हुआ करता था। रक्तबीज को वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की जितनी बूंदें धरती पर पड़ेंगी, उन बूंदों से उसी के समान बलशाली उतने ही रक्तबीज उत्पन्न हो जाएंगे जितनी बूंदें हैं। यानि रक्तबीज का रक्त धरती पर गिरते ही उसी के समान शक्तिशाली असुरों को उत्पन्न कर देता था। इस वरदान के कारण रक्तबीज ने धरती के साथ ही देवलोक तक भी आतंक फैला दिया था। उसका वध करना या उसे पराजित करना लगभग असंभव हो गया था। रक्तबीज के आतंक को समाप्त करने के लिए मां दुर्गा के ललाट से मां कालरात्रि का अवतरण हुआ। माता कालरात्रि और रक्तबीज के बीच भयंकर युद्ध लड़ा गया था। माता जब भी रक्त बीज का वध करती उसके रक्त की कुछ बूंदें धरती पर गिर जातीं और कई और रक्तबीज जन्म ले लेते। ऐसे में माता कालरात्रि ने रक्तबीज के रक्त को धरती पर न गिरने देने के लिए उसे अपने मुंह में भर लिया और इस तरह रक्तबीज का अंत हुआ। धरती और देवलोक रक्तबीज के आतंक से मुक्त हुए।

मां कालरात्रि की पूजा का महत्व

माता कालरात्रि भले ही मां दुर्गा का रौद्र रूप हों लेकिन भक्तों पर हमेशा माता की शुभ दृष्टि रहती है। माता की पूजा करने से रोग-दोष से मुक्ति मिलती है और साथ ही भय और अकाल मृत्यु के डर से भी मुक्ति मिलती है। माता कालरात्रि की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियां आप पर हावी नहीं। माता कालरात्रि के मंत्रों का जप करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक शक्ति प्राप्त होती है। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो माता कालरात्रि की पूजा करने वाले भक्त पर राहु-केतु और शनि ग्रह का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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