माता कात्यायनी को देवी दुर्गा का छठा रूप माना जाता है। नवरात्रि के छठे दिन इनकी पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि 2026 के दौरान माता कात्यायनी की पूजा 16 अक्टूबर को की जाएगी। सौंदर्य, शक्ति और साहस का प्रतीक माता कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और साथ ही जीवन में सुख-शांति भी आती है। आइए ऐसे में जान लेते हैं माता की आरती और मंत्रों के बारे में। पूजा के दौरान आरती और मंत्र जप करके आप मां कात्यायनी को प्रसन्न कर सकते हैं।
मां कात्यायनी की आरती
जय कात्यायनी माँ, माया जय कात्यायनी माँ।
उपमा रहित भवानी, दूँ किसकी उपमा ॥ मैया जय…
दैत्य गिरजापति शिव की तपस्या प्रारम्भ की।
वर-फल जन्म रम्भ गृह, महिषासुर लीन्हाँ ॥ मैया जय…
कर शशांक-शेखर तप, महिषासुर भारी ।
शासन कियो सुरन पर, बन अत्याचारी ॥ मैया जय…
त्रिनयन ब्रह्मा शचीपति, पहुँचे, अच्युता गृह।
महिषासुर बध हेतू, सुर कीन्हौं आग्रह ॥ मैया जय…
सुन पुकार देवन मुख, तेज हुआ मुखरित ।
जन्म लियो कात्यायनी, सुर-नर-मुनि के हित ॥ मैया जय…
अश्विन कृष्ण-चौथ पर, प्रकटी भवभामिनि ।
पूजे ऋषि कात्यायन, नाम काऽऽत्यायिनी ॥ मैया जय…
आश्विन शुक्ल दशी को महिषासुर ने उसका वध कर दिया।
नाम पड़ा रणचण्डी, मरणलोक न्यारा ॥ मैया जय…
दूजे कल्प संहारा, रूप भद्रकाली ।
तीजे कल्प में दुर्गा, मारा बलशाली ॥ मैया जय…
दीन्हौं पद पार्षद निज, जगतजननी माया।
देवी सँग महिषासुर, रूप बहुत भाया ॥ मैया जय…
उमा रमा ब्रह्माणी, सीता श्रीराधा।
तुम सुर-मुनि मन-मोहनि, हरिये भव-बाधा ॥ मैया जय…
मां कात्यायनी की दूसरी आरती
मां कात्यायनी की आरती
जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जय महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा॥
कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करिए।
ध्यान कात्यायनी का धरिए॥
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी॥
मां कात्यायनी की दूसरी आरती
मां कात्यायनी को प्रसन्न करने के लिए मंत्र
- ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
- हे कात्यायनी, महान माया, महान योगिनियों के स्वामी। “हे देवी, गोपा के पुत्र नन्द को मेरा पति बनाओ, मैं तुम्हें प्रणाम करती हूँ
- वह चंद्रमा के समान उज्ज्वल मुस्कान के साथ एक बाघ के रूप में दूल्हे को ले गई, राक्षसों का नाश करने वाली देवी कात्यायनी शुभता प्रदान करें।
- जो देवी सभी प्राणियों में कात्यायनी के रूप में मुझमें निवास करती हैं। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै।
अगर आप जानना चाहते हैं कि नवरात्रि के छठे दिन शुभ-मुहूर्त और राहुकाल का समय कब होगा तो हमारी वेबसाइट पर पंचांग देख सकते हैं।
यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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