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धनतेरस पर धन के देवता कुबेर को प्रसन्न करने के लिए करें इन मंत्रों का जाप, जानें पूजा का तरीका

Author: Ajay Kumar

Published: 05-11-2026, 4:13 PM

धनतेरस का त्योहार सुख-समृद्धि और धन की कामना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा करने की भी परंपरा है। धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में उनकी पूजा करके विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है। आइए जानते हैं भगवान कुबेर के प्रमुख मंत्र, जाप की विधि और हवन से जुड़ी मान्यताएं।

कुबेर मंत्र और जाप की विधि

धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। भगवान कुबेर को धन-संपदा का अधिपति माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्हें पृथ्वी की धन-संपत्ति का स्वामी और भगवान शिव का प्रिय सेवक माना गया है। इसी वजह से धनतेरस पर उनकी पूजा और मंत्र जाप की परंपरा है।

इस विधि से करें मंत्र जाप

धनतेरस के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा स्थल पर कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। अगर प्रतिमा उपलब्ध न हो, तो तिजोरी को कुबेर का प्रतीक मानकर पूजा कर सकते हैं। इसके बाद श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप करें और अंत में विधि-विधान से आरती करें। मान्यता के अनुसार, कुबेर मंत्र की साधना दक्षिण दिशा की ओर मुख करके की जाती है।

कुबेर देव का दुर्लभ मंत्र

धनतेरस पर भगवान कुबेर की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है।

मंत्र: ऊँ श्रीं, ऊँ ह्रीं श्रीं, ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।

विनियोग

इस श्री कुबेर मंत्र के ऋषि विश्वामित्र हैं, मंत्र बृहती हैं, देवता शिवमित्र धनेश्वर हैं और विजय सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए है।

अष्टाक्षर मंत्र से करें आराधना

श्रद्धा और एकाग्रता के साथ भगवान कुबेर का अष्टाक्षर मंत्र का जाप किया जाता है। मंत्र इस प्रकार है: ॐ वैश्रवणाय स्वाहा।

धन-धान्य समृद्धि का मंत्र

कुबेर की पूजा में धन-धान्य की समृद्धि के लिए भी इस मंत्र का उल्लेख किया गया है। मंत्र इस प्रकार है: ॐ यक्षाय कुबेरा वैश्रवणाय धनधान्यधिपतये मुझे धन धान्य समृद्धि दो मुझे स्वाहा दो।

हवन से जुड़ी मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुबेर मंत्र की साधना में मंत्र जाप के बाद दशांश हवन का विधान बताया गया है। इसके लिए तिल का उपयोग किया जाता है। परंपरागत विधान में सूर्योदय से पहले शिव मंदिर में हवन करना उत्तम माना गया है। बिल्वपत्र के वृक्ष की जड़ों के पास बैठकर यह अनुष्ठान करना भी शुभ बताया गया है। मंत्र जाप की निर्धारित संख्या और हवन जैसे अनुष्ठान योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन में करना उचित रहता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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