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5 cricketers Most player-of-the-series awards in Test: टेस्ट क्रिकेट के लंबे इतिहास में ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ बनना किसी खिलाड़ी के निरंतर वर्चस्व का सबसे बड़ा प्रमाण है. इस मामले में भारत के रविचंद्रन अश्विन और श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन ज्वॉइंट रूप से टॉप पर हैं. उनके बाद दक्षिण अफ्रीका के महान ऑलराउंडर जैक कैलिस का नाम आता है. वहीं पाकिस्तान के इमरान खान और न्यूजीलैंड के सर रिचर्ड हैडली भी इस लिस्ट में हैं. इन दिग्गजों ने अकेले दम पर टेस्ट क्रिकेट का रुख बदला है.
सबसे ज्यादा टेस्ट में प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड जीतने वाले 5 खिलाड़ियों की लिस्ट.
नई दिल्ली. क्रिकेट की दुनिया में अक्सर मुकाबले दो टीमों के बीच नहीं, बल्कि किसी एक खिलाड़ी और पूरी विरोधी टीम की रणनीति के बीच महसूस होते हैं. जब कोई खिलाड़ी एक मैच में नहीं, बल्कि पूरी सीरीज में लगातार ऐसा प्रदर्शन करता है कि विरोधी टीम लाचार नजर आने लगे, तो वह हासिल करता है क्रिकेट का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’. टेस्ट क्रिकेट के लंबे और थका देने वाले फॉर्मेट में यह सम्मान हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के करियर का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है.
टेस्ट इतिहास में जब भी सीरीज दर सीरीज अपना वर्चस्व कायम करने वाले खिलाड़ियों का जिक्र होगा, तब श्रीलंका के महान ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन (Muthiah Muralidaran) और भारत के करिश्माई स्पिनर रविचंद्रन अश्विन (R Ashwin) का नाम सबसे ऊपर आएगा. इन दोनों ही दिग्गज गेंदबाजों के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा 11-11 बार ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ बनने का अद्भुत रिकॉर्ड दर्ज है.
मुथैया मुरलीधरन का जादुई दौर
मुथैया मुरलीधरन ने 1992 से 2010 के बीच अपने 18 साल लंबे करियर में 133 टेस्ट मैच और कुल 61 सीरीज खेलीं. उन्होंने अपनी जादुई फिरकी से दुनिया भर के बल्लेबाजों को नचाते हुए 11 बार पूरी सीरीज पर अपनी छाप छोड़ी और यह पुरस्कार जीता. मुरलीधरन की बलखाती गेंदों और ‘दूसरा’ का सामना करना उस दौर में किसी भी विदेशी टीम के लिए सबसे कठिन चुनौती माना जाता था.
अश्विन की ऐतिहासिक महारत
दूसरी ओर, भारत के रविचंद्रन अश्विन ने मुरलीधरन के इस महारिकॉर्ड की बराबरी बहुत ही कम मौकों में कर दिखाई. अश्विन ने 2011 में अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की और 2024 तक खेले गए 106 टेस्ट मैचों की महज 44 सीरीज में ही 11 बार ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का खिताब अपने नाम कर लिया. खासकर भारतीय सरजमीं पर अश्विन का प्रभाव ऐसा रहा है कि विरोधी टीमें सीरीज शुरू होने से पहले ही मानसिक दबाव में आ जाती थीं. बल्ले से अहम योगदान देने और गेंद से मैच जिताऊ प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता ने उन्हें आधुनिक टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा मैच-विजेता बना दिया.
जैक कैलिस सर्वकालिक ऑलराउंडर
इन दोनों फिरकी के जादूगरों के ठीक पीछे दक्षिण अफ्रीका के ऑलराउंडर जैक कैलिस (Jacques Kallis) का नाम आता है. कैलिस को टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे संपूर्ण खिलाड़ी माना जाता है. उन्होंने 1995 से 2013 के बीच 166 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 61 सीरीज के दौरान उन्होंने 9 बार ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का पुरस्कार जीता. कैलिस केवल एक महान बल्लेबाज ही नहीं थे, बल्कि वह एक बेहतरीन तेज गेंदबाज भी थे. जब भी उनकी टीम को जरूरत पड़ी, उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से चमत्कारिक प्रदर्शन करके अपनी टीम को सीरीज जिताई.
इमरान खान का नेतृत्व और रिवर्स स्विंग
इस सर्वकालिक सूची में चौथे और पांचवें स्थान पर दो ऐसे दिग्गज तेज गेंदबाज मौजूद हैं, जिन्होंने अकेले अपने दम पर अपनी टीमों का नक्शा बदल दिया था. पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इमरान खान (Imran Khan) ने 1971 से 1992 के बीच अपने 88 टेस्ट मैचों के करियर में कुल 28 सीरीज खेलीं और इनमें से 8 बार सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए. इमरान खान की रिवर्स स्विंग और आक्रामक कप्तानी का दौर ऐसा था, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को एक अजेय टीम की तरह खड़ा कर दिया था.
सर रिचर्ड हैडली की घातक गेंदबाजी
इमरान खान के साथ ही न्यूजीलैंड के महान तेज गेंदबाज सर रिचर्ड हैडली (Richard Hadlee) ने भी 8 बार यह सम्मान हासिल किया. हैडली ने 1973 से 1990 तक न्यूजीलैंड के लिए 86 टेस्ट मैचों की 33 सीरीज खेलीं. उस दौर में न्यूजीलैंड की गेंदबाजी का पूरा भार अकेले हैडली के कंधों पर होता था. उन्होंने अपनी सटीक लाइन-लेंथ और जानलेवा स्विंग के बल पर कई बार पूरी विरोधी टीम को अकेले धराशायी किया और अपनी टीम को ऐतिहासिक सीरीज जीत दिलाई.
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कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
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