हिंदू धर्म में झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि झाड़ू में कभी भी पैर नहीं लगाना चाहिए और इसे सम्मान के साथ रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, झाड़ू घर की सकारात्मकता और आर्थिक ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती है। इसलिए झाड़ू को ठीक दिशा और सही ढंग से रखा जाए ताकि घर में ऊर्जा का बहाव बना रहे। झाड़ू से जुड़ी इन वास्तु नियमों की अनदेखी करने पर घर में आर्थिक परेशानियां आ सकती हैं। धन की हानि की स्थिति भी बन सकती है। तो यहां जानिए झाड़ू से जुड़े वास्तु नियमों के बारे में।
टूटी झाड़ू कब बदलना चाहिए?
अगर झाड़ू टूट चुकी हो या बहुत पुरानी हो गई हो तो उसे लंबे समय तक इस्तेमाल करने से बेहतर है कि आप उसे बदल दें। वास्तु शास्त्र में यह भी बताया गया है कि झाड़ू को पुराना तभी मानें, जब उसकी तीलियां टूटने लग गई हों। ऐसी झाड़ू का इस्तेमाल करने से घर में नकारात्मकता फैलाती है।
झाड़ू किस दिशा में रखना चाहिए?
वास्तु के अनुसार, झाड़ू रखने के लिए दक्षिण पश्चिम या फिर पश्चिम दिशा सबसे उत्तम माना जाता है। तो अगर संभव हो तो झाड़ू को हमेशा इसी दिशा में रखें। वहीं झाड़ू को कभी भी खुली जगह पर नहीं रखना चाहिए। झाड़ू हमेशा ऐसी जगह पर रखें जहां किसी की नजर न पड़े। झाड़ू को किसी साफ और तय जगह पर रखना अधिक अच्छा माना जाता है। झाड़ू को कभी भी पूजा स्थान, रसोई, या घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर न रखें।
क्या रात में झाड़ू लगाना चाहिए?
हिंदू धर्म में सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाना शुभ नहीं माना गया है तो शाम या रात के समय झाड़ू कभी नहीं लगाएं। अगर घर लंबे समय से बंद है और गंदगी है हर जगह तो ऐसी स्थिति में झाड़ू लगा सकते हैं लेकिन कचरा घर में ही कहीं रख दें। रात में झाड़ू लगाकर कचरा बाहर रखने की मनाही है।
झाड़ू से जुड़ी इन बातों का भी रखें ध्यान
- झाड़ू को सीधा खड़ा करके कभी न रखें।
- झाड़ू को कभी उल्टा भी नहीं रखना चाहिए।
- झाड़ू को ऐसे ही कहीं भी इधर-उधर न फेंकें। इसे सम्मान के साथ रखें।
- झाड़ू पर गलती से भी पैर नहीं लगना चाहिए। अगर गलती से पैर लग जाए तो मां लक्ष्मी का ध्यान करके क्षमा मांग लें।
- पुरानी या टूटी झाड़ू को शनिवार, अमावस्या या ग्रहण के बाद ही घर से बाहर निकालें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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