नई दिल्ली. रात में सड़क पर गाड़ी चलाते समय सामने से आने वाली तेज हेडलाइट कई बार कुछ सेकंड के लिए आंखों के सामने अंधेरा कर देती है। विशेष रूप से बाइक और गाड़ियों में तेजतर्रार लाइटें और शहरों में लगातार इस्तेमाल होने वाली हाई बीम अन्य गाड़ियाँ के लिए बड़ी मुसीबतें निकलीं। अब सरकार इस समस्या को कम करने के लिए साकेत की हेडलाइट से जुड़ी परियोजनाओं में बदलाव की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए नए सिरे से ड्राफ्ट पेश किया है। इसमें नए डोपहिया सर्किट के माउंटेड हेडलैंप को डिफॉल्ट रूप से लो बीम पर रखने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा हेडलाईट की अधिकतम हड्डियों को कम करना, कलर टेंपरेचर की सीमा तय करना और शहरों में एस्थेटिक हाई बीम के इस्तेमाल के लिए संभावित प्रस्ताव जैसे प्रस्ताव भी शामिल हैं। वैसे बिल्डर तो अपने लेवल पर साउंड की लाइट को अपॉइंटमेंट में ही लिखते हैं। लेकिन अक्सर वाहन मालिक खुद से भारी-भरकम लाइट्स गाड़ी में फिट करा देते हैं जिससे दूसरे वाहन चालकों की रात में गाड़ी की सवारी हो जाती है। नए नियम के लागू होने के बाद ऐसा नहीं होगा।
बाइक और कार की हेडलाइट पर क्या बदलेगा
प्रस्ताव के अनुसार नए दोपहिया समाज में फ़्लोरिडा हेडलैंप सिर्फ बीम पर डिफॉल्ट रूप से चलेंगे। पुराने डोपहिया एसोसिएशन को इस बदलाव के अनुभवों से बाहर रखने का प्रस्ताव है। डोपहिया एसोसिएशन की हेडलाइट की अधिकतम लंबाई 1.5 लाख कैंडेला से 1 लाख कैंडेला करने की बात कही गई है। कार के मामले में यह सीमा 2.25 लाख कैंडेला से लेकर 1.5 लाख कैंडेला करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा हेडलाइट के कलर टेंपरेचर को अधिकतम 6,500 केल्विन तक सीमित करने की तैयारी है। इसका मकसद बहुत ज्यादा तेज और आंखों पर चमकने वाली रोशनी को नियंत्रित करना है।
शहर में हाई बीम पर संभावित संभावित
सरकार का एक अहम प्रस्ताव हाई बीम का गलत इस्तेमाल पर्यटन पर रोक लगाने के लिए किया गया है। 60 किलोमीटर प्रति घंटे से कम सचिवालय में यदि वाहन हाई बीम का उपयोग किया जाता है तो संभावित प्रस्ताव का प्रस्ताव है। साथ ही 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की आबादी वाले हाईवे ड्राइविंग में यह बंद रहेगा। जहां इसका मकसद सामने वाले बाजारों में रसायनों को लो बीम के रूप में इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना है, वहां से और आसपास से आने वाले रसायनों की संख्या बहुत ज्यादा है।
क्या सिर्फ कैंडेला लिमिट से जुड़ी समस्या खत्म होगी
इस प्रस्ताव की सबसे बड़ी सीमा सामने दिखाई देती है। रोड पर ओके चौंधियाने की समस्या सिर्फ बेंचमार्क से शुरू की गई हेडलाइट की ताकत की वजह से नहीं है। बड़ी समस्या आफ्टरमार्केट मार्केट, लोकल लाइट और गलत एंगल पर लगी हेडलाइट भी हैं। कई लोग अपनी बाइक या कार में कंपनी की मूल हेडलाइट सैटलाइट अधिकांश पावर वाली मार्केट या मार्केटप्लेस पॉड इंस्टॉल किए हुए हैं। इनमें से कई लाइट्स में सही बीम पैटर्न और कट ऑफ नहीं होता है। नतीजा यह होता है कि रोशनी सीधे सामने वाले ड्राइवर की आंखों पर पट्टी बांध लेती है। इसलिए सिर्फ नई तस्वीरों के लिए कैंडेला की सीमा कम करने से सड़क पर मौजूद सभी तरह की चकाचौंध खत्म नहीं होगी। इसके लिए आफ्टरमार्केट मॉड की निगरानी और गलत तरीके से लगाए गए लाइट्स पर कार्रवाई करना भी जरूरी है।
असली फ़िट लो बीम और सही एंगल से
हेडलाइट की समस्या में लाइट की कुल ताकत के साथ उसका एंगल भी बेहद अहम है। यदि तेज रोशनी सही कट ऑफ के साथ सड़क पर पड़े तो सामने वाले चालक को कम परेशानी होती है। लेकिन वही रोशनी गलत दिशा में हो तो कम बिजली की रोशनी भी आंखों पर खराब हो सकती है। इसी कारण से नए डोपहिया सोसाइटी में लो बीम को डिफॉल्ट रिमोर्ट और शहरों में हाई बीम पर प्रस्तावित प्रस्ताव में व्यावहारिक बदलाव पर विचार किया जा सकता है। इससे ड्राइवर की नियुक्ति में मदद मिल सकती है।
फ़ैज़ और भारी समूह के लिए भी नए नियम
मसऊदे में तितली और भारी स्मारकों में रात और खराब मौसम के दौरान बेहतर दृश्यता के लिए रिफ्लेक्टर टेप अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है। इससे रात में बड़े समूह की पहचान आसान हो रही है और पीछे से होने वाली टक्कर का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। मिनिस्ट्री ने स्टेक होल्डर्स पर 30 दिनों की सलाह के लिए प्रस्तावित बदलावों की पेशकश की है। प्रस्तावित बदलाव अगले साल अप्रैल से लागू होने वाली योजना है। कुल समग्र सरकार का फोकस सिर्फ हेडलाइट की रोशनी कम करने पर नहीं है, बल्कि हाई बीम का इस्तेमाल किया गया है और रात में सड़क सुरक्षा को भी बेहतर किया गया है। हालाँकि, इसका प्रभाव और अधिक प्रभावशाली है जब आफ्टरमार्केट मोदी पोर्ट्रेट लाइट्स गलत बीम एंगल के खिलाफ भी सड़क पर सख्त कार्रवाई होगी।


