इलेक्ट्रिक असोसिएट्स की थोक बिक्री के साथ उनकी बैटरी लाइफ और ऑर्डर में सबसे बड़ी मशीनें शामिल हैं। सुपरमार्केट में बिजनेस चलाने वाले ईवी को बार-बार स्थिरता, रैपिड से एक्सिलरेट करने और अचानक ब्रेक करने वाले बिजनेसमैन का सामना करना पड़ता है, जिससे बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। अब इस चैलेंज का समाधान फ़्लोरिडा की दिशा में भारतीय टेलीकॉम ने एक नई हाइब्रिड ऑटोमोबाइल स्टोरेज तकनीक विकसित की है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) राउरकेला की रिसर्च टीम ने बैटरी और सुपरकैपेसिटर को मिलाकर एक ऐसा स्मार्ट पावर सिस्टम तैयार किया है, जो बिजली की तेजी से बढ़ने वाली मांग को बेहतर तरीके से संभाल सकता है। इस तकनीक का उद्देश्य बैटरी पर कब्जा करने वाले तेज करंट के झटकों को कम करना और उसकी उम्र बढ़ाने में मदद करना है। इस इनोवेशन के लिए प्रोटोटाइप कंपनी को भी भुगतान करना होगा।
शहरों में चलने वाले EV पर अधिक दबाव क्यों है?
इलेक्ट्रिक सार्जेंट के लिए शहरी निगम एक पोर्टेबल ऑपरेटिंग कंडीशन माना जाता है। शहर में कम्युनिटी को कॉन्स्टेबल स्टॉप-एंड-गो कंपनी से गाजियाबाद है। कभी तेज एक्सीलरेशन की जरूरत खत्म हो जाती है तो कभी अचानक ब्रेक लग जाता है। इन पेनसिल्वेनिया में बैटरी से कम समय में काफी अधिक धारा प्रवाहित होती है या पुनर्जनन ब्रेकिंग के दौरान तेजी से ली गई ऊर्जा वापस बैटरी में प्रदर्शित होती है। लगातार होने वाले ऐसे बदलाव बैटरी सेल पर इलेक्ट्रिकल और थर्मल स्ट्रेस को बढ़ाया जा सकता है।
लंबे समय तक भारी दबाव की स्थिति, रहने पर बैटरी की क्षमता, धीरे-धीरे कम हो सकती है और उसकी कुल सेवा अवधि भी प्रभावित हो सकती है। इसी समस्या पर ध्यान दिया गया एनआईटी राउरकेला की टीम ने नई ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) तैयार की है।
बैटरी के साथ सुपरकैपेसिटर जोड़ा गया
इस नई तकनीक की सबसे अहम बात बैटरी के साथ सुपरकैपेसिटर का उपयोग किया जाता है। सुपरकैपेसिटर पारंपरिक बैटरी की तुलना में बहुत तेजी से चार्ज और स्थिरता होने की क्षमता होती है। जब वाहनों को अप्रत्याशित अधिकतम शक्ति की आवश्यकता होती है, तो सुपरकैपेसिटर उस अतिरिक्त उपकरण को बनाए रखा जा सकता है।
इसी तरह के अचानक टूटने के दौरान पैदा होने वाली ऊर्जा को भी तेजी से हासिल किया जा सकता है। इसका सीधा लाभ यह होता है कि हर स्थिति में बैटरी को अचानक भारी करंट देना या लेने की आवश्यकता नहीं होती है। यानी बैटरी पर अपलोड करने वाले झटकों को कम किया जा सकता है।
तीन प्रमुख कंपनियों से बना है नया सिस्टम
वैगन ने इस हाइब्रिड ऑटोमोबाइल स्टोरेज सिस्टम को अंतिम सरल रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया है। सिस्टम में मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण विचारधाराओं का उपयोग किया गया है।
1. एकल कन्वर्टर
इस तकनीक में एक ही बैटरी और सुपरकैपेसिटर दोनों को वाहनों के इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जोड़ा गया है। इससे अलग-अलग पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अतिरिक्त स्विचिंग कंपनियों की जरूरत कम हो जाती है। कम कंपोनेंट से सिस्टम का डिज़ाइन सरल बनाया जा सकता है और स्केल भी बनाया जा सकता है।
2. संकेतक
सिस्टम में संकेतक द्वारा प्रयुक्त विद्युत धारा की तीव्र वृद्धि या घटने को नियंत्रित करने के लिए किया गया है। इस पावर फ्लो को और अधिक स्थिर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
3. एकल नियंत्रण प्रणाली
संपूर्ण सिस्टम को नियंत्रित करने के लिए एक एकल नियंत्रण रणनीति का उपयोग किया गया है। ये वाहन अलग-अलग ड्राइविंग के अनुसार बैटरी और सुपरकैपेसिटर के बीच ऊर्जा के प्रवाह को प्रभावित करते हैं।
अचानक एक्सीलरेशन और ब्रेकिंग सिस्टम कैसे काम करता है?
मैन इलेक्ट्रिक वाहन अचानक तेज गति पकड़ लेता है। इस स्थिति में मोटर को तुरंत सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत होगी। पारंपरिक सिस्टम में इस अतिरिक्त पावर इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा हिस्सा सीधे बैटरी पर लगाया जा सकता है। नई हाइब्रिड तकनीक में सुपरकैपेसिटर इस तरह की अचानक बढ़ने वाली पावर डिटेक्शन को प्रारंभिक रूप से मदद करता है। इससे बैटरी को कम समय में भारी करंट से राहत मिल सकती है।
वहीं ब्रेक के दौरान रीजेनरेटिव एनर्जी पैदा होती है। इस समय सुपरकैपेसिटर रैपिड से ऊर्जा को एकत्रित करने में मदद मिल सकती है। इससे बैटरी पर अचानक दबाव कम किया जा सकता है।
परीक्षण में 48 वोल्ट का स्थिर स्थिरांक
एनआईटी राउरकेला की रिसर्च टीम ने इस सिस्टम को अलग-अलग रेनॉल्ट में परीक्षण किया। इसमें अचानक ब्रेकिंग, तेज एक्सीलरेशन और वाहनों की धीमी गति की स्थिति शामिल है। परीक्षण के दौरान सिस्टम ने 48 वोल्ट का स्थिर वोल्टेज बनाए रखने की दृश्य क्षमता रखी। साथ ही बैटरी करंट में होने वाले परिवर्तनशील परिवर्तनों को नियंत्रित करने में भी ये प्रभावशाली पाया गया। सुपरकैपेसिटर ने तेजी से पावर सपोर्ट सर्वर सिस्टम की ऊर्जा मांग को आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इन इलेक्ट्रिक सामान में इस्तेमाल किया जा सकता है
यह तकनीक विशेष रूप से 24 से 60 वोल्ट डीसी आधारित लो-वोल्टेज इलेक्ट्रिक स्पीकर स्टेज के लिए व्यावहारिक रूप से प्रस्तुत की गई है। इसका उपयोग भविष्य में कई तरह के मिश्रण में किया जा सकता है, जिनमें ये शामिल हैं-
- विद्युत उपकरण
- इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल
- ई- कार्पोरेशन
- इलेक्ट्रिक कार्गो थ्री- मालवाहक
- पाइपलाइन गतिशीलता बज़ार
- औद्योगिक यूटिलिटी बिज़नेस


