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दिवाली पर जरूर करें प्रभु श्रीराम की आरती, यहां पढ़ें ‘श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…’ समेत राम जी की आरती का संग्रह

Author: Ajay Kumar

Published: 07-11-2026, 6:05 PM

दिवाली का त्योहार भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है। सनातन धर्म ग्रंथों के अनुसार, 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन पर नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। प्रभु श्रीराम की आराधना से मन को शांति मिलती है। दिवाली के शुभ अवसर पर श्रीराम की पूजा और आरती करना भी भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। आइए जानते हैं भगवान राम की आरती के पूरे बोल, जिनका गायन आपको दिवाली की पूजा के दौरान करना चाहिए।

1. राम जी की आरती (Ramchandra Ji Ki Aarti)

आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥

दशरथ तनय कौशल्या नन्दन, सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥

भक्त के पीछे, भक्त की छाती चंदन है, श्रेष्ठ पुरुषों की गरिमा।

निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि, सकल लोक वंदित विविध विधि।

हरण शोक-भय दायक नव निधि, माया रहित दिव्य नर वर की॥

जानकी पति सुर अधिपति जगपति, अखिल लोक पालक त्रिलोक गति॥

ब्रह्मांड असीमित पथ की पूजा करता है, जो सभी चर और अचर का एकमात्र मार्ग है।

शरणागत वत्सल व्रतधारी, भक्त कल्प तरुवर असुरारी॥

नाम लेत जग पावनकारी, वानर सखा दीन दुख हर की॥

2. श्री राम चंद्र जी की आरती (Shri Ram Ji Ki Aarti)

श्री राम चन्द्र दयालु भक्त भयानक भय का नाश करने वाले।


नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।

कामदेव अगणित अथाह छवि नौ नील कमल सुन्दर।

पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

दिन के दरिद्र भाई की पूजा करो, दानव-विशाल जाति का विनाशक।
रघुनंदन आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नंदन।

मस्तक मुकुट कुण्डल तिलक सुन्दर उदार अंग आभूषण।
आज भुज शर आर्क धार युद्ध में खर-दूषण जीते

इस प्रकार तुलसीदास, शंकर और अन्य ऋषि मन को प्रसन्न करते हुए कहते हैं।
मेरे हृदय में निवास करो, हे कमल, हे कामी, दुष्ट दल, गंजाना।

..शौक..

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलु सनेहु जंत रावरो।।

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।

तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।



।।सोरठा।।

जानि गौरी उपयुक्त सिय हिय हरषु न जाइ कहि।

मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

यहां से डाउनलोड करें राम जी की आरती का पीडीएफ

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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