सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और आराधना के लिए समर्पित है। विधि-विधान और सच्चे मन से यह व्रत करने से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति की मान्यता है। अगर आप भी कल पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने वाले हैं, तो पूजा से पहले जरूरी सामग्री की पूरी लिस्ट तैयार कर लें।
एकादशी पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर 2026 को रखा जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए कुछ खास सामग्रियों की जरूरत होती है। पूजा से पहले इन सभी चीजों को एक जगह रख लें, ताकि पूजा के दौरान किसी सामान की कमी न हो।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर
- पीला या लाल कपड़ा
- पीले फूल और फूलों की माला
- तुलसी दल
- फल और मिठाई
- पंचामृत
- रोली और चंदन
- अक्षत यानी साबुत चावल
- कलावा
- घी का दीपक
- धूपबत्ती और कपूर
- आरती की थाली
- शुद्ध जल और पूजा के पात्र
- भगवान विष्णु को अर्पित करने के लिए नैवेद्य
सुबह स्नान से करें शुरुआत
एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें। व्रत के दौरान शारीरिक स्वच्छता के साथ मन की शुद्धता का भी ध्यान रखना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करके व्रत का संकल्प लें।
खानपान का रखें ध्यान
एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु चावल और अनाज का सेवन करने से परहेज करते हैं। इस दिन प्याज, लहसुन, मांस और मछली जैसी तामसिक चीजों से भी दूर रहने की परंपरा है। व्रती अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार या निर्जल व्रत कर सकते हैं।
तुलसी और आचरण के नियम
विष्णु जी की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है। पहले से उपलब्ध तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल करें, क्योंकि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करने से भी परहेज किया जाता है।
मन को रखें शांत
एकादशी के दिन क्रोध, कटु वचन और विवाद से बचें। भगवान विष्णु का स्मरण करें और जरूरतमंद लोगों की मदद करने का प्रयास करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
ये भी पढ़ें: कोजागरी पूजा 25 या 26 अक्टूबर को? नोट कर लें सही तारीख, निशिता मुहूर्त और मां लक्ष्मी की पूजा विधि


