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21 अक्टूबर को चंद्रमा-राहु की युति से बनेगा ग्रहण दोष, मन-भावनाओं पर पड़ सकता है असर, जानें दोष कम करने के उपाय

Author: Ajay Kumar

Published: 20-10-2026, 3:55 PM

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है, जबकि राहु भ्रम और अप्रत्याशित घटनाओं से जुड़ा है। 21 अक्टूबर 2026 की सुबह चंद्रमा और राहु की युति बनेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इसे चंद्र ग्रहण दोष कहा जाता है। इस युति के प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसके प्रभाव और दोष को शांत करने के लिए बताए गए उपाय।

चंद्रमा-राहु की युति

21 अक्टूबर की सुबह करीब 7 बजे चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि में राहु पहले से विराजमान हैं। ऐसे में दोनों ग्रहों की युति बनेगी, जिसे ज्योतिष में चंद्र ग्रहण दोष कहा जाता है। मान्यता है कि कुंडली में चंद्रमा और राहु की स्थिति के अनुसार इसका प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।

चंद्रमा-राहु युति के सकारात्मक प्रभाव

ज्योतिष अनुसार, चंद्रमा-राहु की युति व्यक्ति को जीवन की परिस्थितियों को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित कर सकती है। इस दौरान फैसले लेने से पहले उनके संभावित परिणामों पर विचार करने और तर्क के आधार पर निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लंबे समय के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिल सकती है।

चंद्रमा-राहु युति के नकारात्मक प्रभाव

चंद्रमा-राहु की युति के नकारात्मक प्रभावों में बेचैनी, चिंता, भावनात्मक अस्थिरता और निर्णय लेने में भ्रम जैसी स्थितियां शामिल मानी जाती हैं। कुछ मान्यताओं में इसे अनिद्रा और सिरदर्द जैसी परेशानियों से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, इन लक्षणों को केवल ग्रहों की स्थिति से जोड़ना उचित नहीं है। लगातार परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

चंद्रमा के अशुभ प्रभाव कम करने के उपाय

  • चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए भगवान शिव की पूजा, माता की सेवा और जल व दूध का दान करें।
  • इसके अलावा ‘ऊं चंद्राय नमः’ मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। साथ ही सफेद चीजें दान करने से मन की शांति के लिए सकारात्मक वातावरण बनता है।

ये उपाय दूर करेंगे राहु के नकारात्मक प्रभाव

  • राहु के प्रभाव को शांत करने के लिए ऊं रां राहवे नमः मंत्र का जाप, मां दुर्गा और भगवान भैरव की पूजा तथा सरस्वती आराधना करने की मान्यता है।
  • शनिवार को जरूरतमंदों की सेवा करना और तिल, नारियल व उड़द की दाल का दान करना भी उपायों में शामिल है।
  • गोमेद या मोती जैसे रत्न ज्योतिषीय सलाह के बिना धारण नहीं करने चाहिए।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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