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विजयादशमी के दिन करें भगवान राम की आरती और चालीसा का पाठ, हर कार्य में मिलेगी सफलता और दूर होंगे सभी संकट

Author: Ajay Kumar

Published: 19-10-2026, 1:27 PM

हिंदू धर्म में विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व को अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध किया जाता था। विजयादशमी के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। विजयादशमी के दिन श्रीराम चालीसा का पाठ और रघुनंदन जी आरती भी जरूर करें। ऐसा करने से जातक को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

श्री राम चालीसा

॥ चौपाई ॥

श्री रघुबीर भक्त हितकारी।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥

निशि दिन ध्यान धरै जो कोई।ता सम भक्त और नहीं होई॥

ध्यान धरें शिवजी मन मांही।ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं॥

दूत तुम्हार वीर हनुमाना।जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना॥

जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला। साधुओं की सदैव रक्षा करो।

तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला।रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥

तुम अनाथ के नाथ गोसाईं।दीनन के हो सदा सहाई॥

ब्रह्मा आदि आपका अतिक्रमण नहीं कर सकते। हे प्रभु, वे सदैव आपका यश गाते हैं।

चारिउ भेद भरत हैं साखी।तुम भक्तन की लज्जा राखी॥

गुण गावत शारद मन माहीं।सुरपति ताको पार न पाहिं॥

नाम तुम्हार लेत जो कोई।ता सम धन्य और नहीं होई॥

राम नाम है अपरम्पारा।चारिहु वेदन जाहि पुकारा॥

गणपति का नाम है आपका. उनका प्रथम पूज्य कौन है?

शेष रटत नित नाम तुम्हारा।महि को भार शीश पर धारा॥

फूल समान रहत सो भारा।पावत कोऊ न तुम्हरो पारा॥

भरत नाम तुम्हरो उर धारो।तासों कबहूं न रण में हारो॥

नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा।सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥

लखन तुम्हारे आज्ञाकारी।सदा करत सन्तन रखवारी॥

ताते रण जीते नहिं कोई।युद्ध जुरे यमहूं किन होई॥

महालक्ष्मी धर अवतारा।सब विधि करत पाप को छारा॥

सीता राम पुनीता गायो।भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥

घट सों प्रकट भई सो आई।जाको देखत चन्द्र लजाई॥

जो तुम्हरे नित पांव पलोटत।नवो निद्धि चरणन में लोटत॥

सिद्धि अठारह मंगलकारी।सो तुम पर जावै बलिहारी॥

औरहु जो अनेका प्रभुताई।सो सीतापति तुमहिं बनइ।

इच्छा ते कोटिन संसारा।रचत न लागत पल की बारा॥

जो कोई अपने मन को आपके चरणों में लाएगा उसे मुक्ति मिल जाएगी।

सुनहु राम तुम तात हमारे।तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे॥

तुमहिं देव कुल देव हमारे।तुम गुरु देव प्राण के प्यारे॥

जो कुछ हो सो तुमहिं राजा।जय जय जय प्रभु राखो लाजा॥

राम आत्मा पोषण हारे।जय जय जय दशरथ के प्यारे॥

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरुपा।नर्गुण ब्रहृ अखण्ड अनूपा॥

सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी।सत्य सनातन अन्तर्यामी॥

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै।सो निश्चय चारों फल पावै॥

सत्य शपथ गौरीपति कीन्हिन।तुमने भक्तिहिं सब सिद्धि दीन्हिन।

ज्ञान हृदय है, ज्ञान स्वरूप है।

आप धन्य हैं, आप धन्य हैं, आप धन्य हैं।

देवताओं के मुख से सत्य और पवित्रता का गायन हुआ।

सत्य सत्य तुम सत्य सनातन।तुम ही हो हमरे तन-मन धन॥

याको पाठ करे जो कोई।ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥

आवागमन मिटै तिहि केरा।सत्य वचन माने शिव मेरा॥

और आस मन में जो होई।मनवांछित फल पावे सोई॥

जो ध्यान के तीन काल लाते हैं। तुलसी दल को अन्य फूल चढ़ाने चाहिए।

साग पत्र सो भोग लगावै।सो नर सकल सिद्धता पावै॥

अन्त समय रघुबर पुर जाई।जहां जन्म हरि भक्त कहाई॥

श्री हरिदास कहै अरु गावै।सो बैकुण्ठ धाम को पावै॥

॥ दोहा

सात दिवस जो नेम कर,पाठ करे चित लाय।


हरिदास हरि कृपा से,अवसि भक्ति को पाय॥

राम चालीसा जो पढ़े,राम चरण चित लाय।

जो इच्छा मन में करै,सकल सिद्ध हो जाय॥

भगवान श्री राम की आरती

श्री रामचन्द्र, दयालु, मेरे मन की पूजा करें, मृत्यु के भयानक भय को नष्ट करें।

नव कंज लोचन, कंज मुख करकंज पद कंजारुणम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

कामदेव अगणित अथाह छवि, नव नील नील सुंदर।

पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचिनौमि जनक सुतावरम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

भजु दीनबंधु दिनेशादव राक्षस वंश निकंदम।

हे रघु के आनंद, हर्षित कंद, कुशल चंद्रमा, दशरथ के आनंद।

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

मस्तक मुकुट कुण्डल तिलकचारु उदार अंग आभूषण।

अजानुभुज तेज-तर्रार थे, उन्होंने तलवार प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई जीती

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

तुलसीदास यही कहते हैं, शंकर बाकी मुनि मन को आनंदित करते हैं।

मेरे हृदयकमल में निवास करो, काम आदि के दुष्ट दल का नाश करने वाली।

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

मन जाहि राचेऊ मिलहिसो वर सहज सुन्दर सांवरो।

करुणा निधान सुजानशील सनेह जानत रावरो॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

एहि भाँति गौरी असीससुन सिय हित हिय हरषित अली।

मैंने तुलसी माता की पूजा की और मन को प्रसन्न करते हुए बार-बार मंदिर में गया।

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

राम जी के मंत्र

  1. ॐ श्री रामचन्द्राय नमः।
  2. ॐ श्री रामाय नमः॥
  3. ॐ राम रामाय नमः.
  4. हे श्री राम, रामभद्र, रामचन्द्र, वेधास, रघु, नाथ और सीता, मैं आपको प्रणाम करता हूँ।
  5. श्री राम, जय राम, जय जय राम।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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